Monday, April 15, 2019

Monday, April 8, 2019

अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति : अब्राहम लिंकन

अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने ही अमेरिका में दास प्रथा (गुलामी प्रथा) का अंत किया था। उनका जन्म एक गरीब अश्वेत परिवार में 14 अप्रैल 1865 को हुआ था। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में गृह युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया। 

उन्होंने दास प्रथा का अंत किया, सरकार और अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। वो सदैव सत्य और अच्छाई का पक्ष लेते थे। उन्होंने वकील के पेशे में हमेशा न्याय का साथ दिया। अन्याय का पक्ष उन्होंने कभी नही लिया। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गयी। 



अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 को होड्जेविल्ले, केंटकी में हुआ था। वो एक गरीब परिवार में जन्मे थे। उनकी पढ़ाई घर पर ही हुई थी। अब्राहम लिंकन इलिनॉय में वकालत करने लगे। 

उनके पिता का नाम थॉमस और उनकी माता का नाम नैंसी हैंक्स लिंकन था। अब्राहम लिंकन के पिता को पैसों के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता था। जब अब्राहम 9 साल के थे तब उनकी मां का देहांत हो गया था। 

लिंकन की मां के गुजरने के बाद उनके पिता ने फिर से विवाह कर लिया। सौतेली मां ने लिंकन को अपने बेटे की तरह प्यार दिया और उनका मार्गदर्शन किया। बचपन से ही अब्राहम को पढ़ने लिखने का बहुत शौक था। 

उनको किताबें पढ़ना बहुत प्रिय था। किताबों के लिए वह मीलों दूर तक पैदल ही चले जाते थे। “द लाइफ ऑफ जॉर्ज वाशिंगटन” उनकी प्रिय पुस्तक थी। 21 वर्ष का हो जाने के बाद अब्राहम ने बहुत तरह के काम किए। 

उन्होंने दुकानदार, पोस्ट मास्टर, सर्वेक्षक जैसी बहुत सी नौकरियां की। जीविका के लिए वह कुल्हाड़ी से लकड़ी काटने का काम करने लगे। उन्होंने सुअर काटने से लेकर लकड़हारे तक का काम किया, और खेतों में मजदूरी भी की। 

1843 में अब्राहम लिंकन ने मैरी टॉड नामक लड़की से विवाह कर लिया। सभी लोग मेरी टॉड को एक महत्वकांक्षी नकचढ़ी घमंडी लड़की समझते थे। मैरी के बारे में यह बात बहुत प्रसिद्ध थी कि वह हमेशा कहती थी कि वह उस पुरुष से विवाह करेगी जो अमेरिका का राष्ट्रपति बनेगा। 

इस बात के लिए सभी लोग उसका बहुत मजाक उड़ाते थे। लिंकन की पत्नी ने 4 बच्चों को जन्म दिया पर उनमें से सिर्फ एक रॉबर्ट टॉड ही जीवित बचा। सब लोग ऐसी बातें करते हैं कि लिंकन की पत्नी उनसे बात-बात पर झगड़ा करती थी और उनको बिल्कुल भी सम्मान नहीं देती थी 

राष्ट्रपति बनने से पहले अब्राहम लिंकन ने 20 सालों तक वकालत की, पर इस दौरान उन्होंने सदैव सत्य और न्याय का ही साथ दिया। उन्होंने महात्मा गांधी की तरह कभी भी झूठे मुकदमे नहीं लिए। सदा सत्य और न्याय से जुड़े मुकदमे ही लिए। 

अब्राहम लिंकन ने वकालत से कभी बहुत ज्यादा पैसा नहीं कमाया क्योंकि वह गरीब व्यक्तियों से बहुत कम पैसा लेते थे। बहुत से मुकदमों का निपटारा वह न्यायालय से बाहर ही कर देते थे जिसमें उनको ना के बराबर फीस मिलती थी। 

वो अपने मुवक्किलों को कोर्ट के बाहर ही सुलह करने की सलाह देते थे जिससे समय और धन की बर्बादी ना हो। एक बार उनके एक मुवक्किल ने उनको $25 फीस दी, पर लिंकन ने सिर्फ $15 लिए और $10 वापस कर दिए। 

लिंकन ने कहा कि उनकी फीस सिर्फ $15 ही बनती है। उनकी ईमानदारी और सच्चाई की बहुत ही कहानियां है। लिंकन ने कभी भी झूठे मुकदमों को नहीं लड़ा। हमेशा सच का साथ दिया। वह कभी भी धन के लोभी नहीं रहे। 

यही वजह थी कि वह वकालत के समय बहुत कम पैसा ही कमा पाते थे। वह किसी भी धर्म का पक्ष नहीं लेते थे। वह कहते थे कि जब मैं अच्छा काम करता हूं तो अच्छा अनुभव करता हूं और जब बुरा काम करता हूं तो बुरा अनुभव करता हूं। यही मेरा धर्म है। 

अब्राहम लिंकन न्यू रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य थे। रिपब्लिकन पार्टी दास प्रथा को खत्म करना चाहती थी। उनका विचार था कि मनुष्य को दास बनाकर खरीदना बेचना या रखना अमानवीय कार्य है। दास प्रथा को लेकर पूरा अमेरिका देश बंटा हुआ था। 

आधे लोग चाहते थे कि दास प्रथा खत्म हो जाए जबकि आधे लोग चाहते थे कि यह जारी रहे। दक्षिण अमेरिका के गोरे निवासी चाहते थे कि गुलाम (अश्वेत) उनके खेतों में मजदूरों की तरह काम करें। गोरे अश्वेत नागरिकों को अपना गुलाम बनाना चाहते थे। 1860 में अब्राहम लिंकन को अमेरिका के 16 राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। 

15 अप्रैल 1865 में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में एक सिनेमाघर में अब्राहम लिंकन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जाने माने अभिनेता जॉन वाइक्स बूथ ने उनकी हत्या की जब वो “ऑवर अमेरिकन कजिन” नाटक देख रहे थे। 

दिलचस्प बात यह थी कि लिंकन को जिस वक्त गोली मारी गई थी उस वक्त उनके निजी सुरक्षागार्ड जॉन पार्कर उनके साथ मौजूद नहीं थे। लिंकन को गोली मारने वाले जॉन वाइक्स बूथ को 10 दिन बाद वर्जीनिया के एक फार्म से पकड़ा गया, जहां अमेरिकी सैनिकों ने उन्हें एक मुठभेड़ में मार गिराया। 

लिंकन की तस्वीर अमेरिका के नोटों पर होती है। $5 के नोट पर अब्राहम लिंकन की तस्वीर होती है। इसके अलावा अमरीकी सेंट / पैनी पर भी अब्राहम लिंकन की तस्वीर होती है। उनके सम्मान में अनेक डाक टिकट भी जारी किए गए हैं। डाक टिकट में वह सदैव दाढ़ी में दिखते हैं। लिंकन की सबसे प्रसिद्ध मूर्ति माउंट रशमोर में बनी है। 

जिसे लिंकन मेमोरियल के नाम से जाना जाता है। वाशिंगटन डीसी में पीटरसन हाउस में भी उनकी बड़ी सी प्रतिमा बनी है। स्प्रिंगफील्ड इलिनॉय में अब्राहम लिंकन लाइब्रेरी और संग्रहालय बना हुआ है। लिंकन के घर के पास ही उनकी कब्र बनाई गई है।

Friday, April 5, 2019

दुनिया का पहला 5G मोबाइल नेटवर्क

इंटरनेट की दुनिया की एक नई तकनीक 5G लाॅन्च होने के लिए तैयार है। 2G , 3G, 4G नेटवर्क के बाद अब दक्षिण कोरिया पांच अप्रैल को पूरे देशभर में 5जी नेटवर्क की सुविधा लाॅन्च करेगा। इसके बाद द.कोरिया 5जी नेटवर्क वाला पहला देश बनेगा। 5जी नेटवर्क आने के बाद वायरलेस इंटरनेट की रफ्तार 4जी नेटवर्क की तुलना में 20 गुना तक बढ़ जाएगी। 


अगले साल तक भारत में भी होगी शुरू 

5 जी के लिए इस साल जुलाई या अगस्त में स्पेक्ट्रम की निलामी होनी की उम्मीद है। स्पेक्ट्रम खरीदने के बाद कंपनियां इन्फ्रास्टक्चर तैयार करेंगी फिर सर्विसेस शुरू होंगी। माना जा रहा है भारत में 5जी सेवा अगले साल ही शुरू होगी। 



इतनी होगी स्पीड 

4G नेटवर्क की अधिकतम स्पीड अब तक 45 मेगाबाइट प्रति सेकेंड रिकाॅर्ड की गई है। 5G में यह स्पीड 1 गीगाबाइट प्रति सेकेंड पहुंच जाएगी। यानी ढ़ाई घंटे की एक हाई क्वालिटी फिल्म को एक सेकेंड में डाउनलोड किया जा सकता है। माना जा रहा है कि 5G नेटवर्क आने के बाद टोस्टर से टेलीफोन और इलेक्ट्रिक कार से पावर ग्रिड तक तकनीक में बदलाव देखने को मिलेंगे। 


5G नेटवर्क के बारे में जानिए ये बातें 

  1. 5G यूजर्स को 4G नेटवर्क से 20 गुना ज्यादा स्पीड मिलेगी। इस स्पीड का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं एक पूरी एचडी फिल्म सिर्फ 1 सेकंड में डाउनलोड की जा सकेगी। 
  2. 5G यूजर्स को भीड़ में भी अपने मोबाइल प्रोवाइडर से कनेक्ट होने में 3G और 4G नेटवर्क्स के मुकाबले कोई दिक्कत नहीं होगी। 
  3. एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट तक डेटा का एक पैकेट पहुंचने में जितना समय लगता है उसे लेटेंसी कहते हैं। 5G के केस में, लेटेंसी रेट 1 मिलिसेकंड होगा जबकि 4G नेटवर्क में यह रेट 10 मिलिसेकंड होता है। 
  4. 5G नेटवर्क के अडवांस्ड ऐप्लीकेशन के रूप में आप स्व:चलित गाड़ियों को सकेंगे। ये गाड़ियां 5G नेटवर्क के जरिए नियंत्रित की जा सकेंगी।

Thursday, April 4, 2019

इंग्ल‍िश होगी शानदार अगर याद कर लेंगे ये 10 शब्द खास

जानिए अंग्रेजी के ऐसे 10 शब्दों के बारे में जिसका इस्तेमाल ज्यादातर लोग नहीं करते हैं| लेकिन अच्छी अंग्रेजी सीखने के लिए इनको याद करना जरूरी है :

इंग्लिश शब्दों के हिसाब से काफी धनी भाषा है| इससे हम लोगों को भी खूब फायदा लेने की जरूरत है| यहां कई ऐसे शब्द हैं जो उपयोग के हिसाब से कॉमन नहीं होते हैं और आप उनके बारे में कम ही जानते हैं| जानिए ऐसे ही शब्दों के बारे में...

  1. Overmorrow: अंग्रेजी में कल के बाद वाले दिन को बताने के लिए ज्यादातर लोग The Day After Tommorow का प्रयोग करते हैं| इतने लंबे वाक्य से बचने के लिए आप Overmorrow शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं|
  2. Tittle: i और j के ऊपर वाले डॉट को क्या कहते हैं| जरा दिमाग पर जोर दीजिए और बताइए| अगर आपको पता चल गया हो तो अच्छी बात है| जिन लोगों को अभी भी पता नहीं चल पाया है तो बता दें कि इसे Tittle कहते हैं|
  3. Glabella: इस शब्द का इस्तेमाल आप दोनों भौहों के बीच की जगह को बताने के लिए कर सकते हैं|
  4. Obelus: ÷ इसे क्या कहते हैं? आप सिंपल सा जवाब देंगे कि यह Division का चिन्ह है| हां, यह Division का ही चिन्ह है| और इसे Obelus कहा जाता है|
  5. Vagitus: जब कोई नवजात शिशु रोता है तो उसके रोने को Cry बोलने से ज्यादा बेहतर है कि आप Vagitus बोलें|
  6. Barm: बीयर के झाग को Barm कहते हैं|
  7. Purlice: तर्जनी उंगली और अंगूठे के बीच की खाली जगह को Purlicue कहते हैं|
  8. Snellen Chart: जब आप अपने आंखों की जांच करवाने के लिए अस्पताल जाते हैं तो वहां आपको एक चार्ट पढ़ने के लिए दिया जाता है, जिस पर Alphabet लिखे रहते हैं| इस चार्ट को Snellen Chart कहते हैं|
  9. Aphthongs: Knee, Island, half इन शब्दों को बोलते समय आप पहले शब्द में K, दूसरे शब्द में S और तीसरे शब्द में L को साइलेंट रखकर बोलते हैं| इन साइलेंट अक्षरों को ही Aphthongs कहा जाता है|
  10. Rasceta: आपकी कलाई पर बनने वाली लकीरों को Rasceta कहा जाता है|

Tuesday, April 2, 2019

चाइनामैन बॉलिंग क्या है?

क्रिकेट में चाइनामैन बॉलिंग शब्द काफी प्रचलित और जब से टीम इंडिया में चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव टीम इंडिया में आये है तब से ही ये शब्द भारतीय प्रशंसको के लिए पहेली सा बना हुआ है| आज ऐसे बहुत से क्रिकेट प्रशंसक है जिनको चाइनामैन के पीछे की कहानी नहीं पता है| अगर आपको भी नहीं पता है तो आज हम आपको बताएँगे कि चाइनामैन बॉलिंग शब्द कहा से आया है और चाइनामैन गेंदबाजी क्या होती है| 


साल 1933 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच मेनचेस्टर में टेस्ट मैच खेला जा रहा था वेस्टइंडीज में एक चीनी मूल के गेंदबाज एलिस अचोंग शामिल थे| जो उस समय बेहतरीन गेंदबाजी करते थे| इस टेस्ट मैच में जब इंग्लैंड के बल्लेबाज वाल्टर रॉबिन्स बेटिंग कर रहे थे तब गेंदबाज एलिस अचोंग ने ऐसी बॉल डाली जो ऑफ स्टंप के बाहर से टर्न होकर स्टंप पर जा लगी थी| 

वाल्टर रॉबिन्स इस गेंद को बिलकुल नहीं समझ पाए थे| रॉबिन्स ने आश्चर्यजनक गेंद करने के बाद पवेलियन लौटते समय अंपायर से कहा, ‘चाइनामैन ने शानदार गेंदबाजी की|’ यही से चाइनामैन बॉलिंग शब्द लोकप्रिय हो गया और फिर आगे चलकर इन्हें चाइनामैन कहा जाने लगा| 

इस गेंदबाजी में लेफ्ट आर्म गेंदबाज अपनी अँगुलियों से नहीं बल्कि अपनी कलाइयों से गेंद को स्पिन कराता है और इस गेंदबाजी को ही चाइनामैन गेंदबाजी कहा जाता है| टीम इंडिया कुलदीप यादव एकलौते खिलाड़ी है जो चाइनामैन बॉलिंग करते है| वैसे आपको बता दे दुनिया में बहुत से गेंदबाज है जो चाइनामैन गेंदबाज शब्द से प्रसिद्ध हुए है| जिनमें वेस्टइंडीज के एलिस अचोंग और गैरी सोबर्स, इंग्लैंड के जॉनी वार्ड्ले और ऑस्ट्रेलिया के ब्रैड हॉग का नाम शामिल है|