Wednesday, August 21, 2019

क्या आप जानते हैं, पेड़ों में क्यों लगाया जाता है सफेद रंग?

अक्सर आप पेड़ों पर सफेद रंग की पुताई देखे होंगे। पर क्या आप जानते हैं, पेड़ों पर सफेद रंग क्यों लगाया जाता है। 

अक्सर आप पेड़ों पर सफेद रंग की पुताई देखे होंगे। पर क्या आप जानते हैं, पेड़ों पर सफेद रंग क्यों लगाया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख द्वारा बताते हैं। 



पेड़ो पर क्यों की जाती है सफेद रंग की पुताई 


दरअसल, पेड़ों पर रंग करने का मतलब है कि ये पेड़ सरकारी प्रौपर्टी हैं। और वन विभाग इसका देखभाल कर रहा है। इसके साथ ही पेड़ पर सफ़ेद रंग लगाने का ये भी मतलब है कि सरकार के इजाजत के बिना आप पेड़ को नहीं काट सकते। 

पेड़ पर सफेद रंग इसलिए भी लगाया जाता है क्योंकि सफेद रंग अंधेरे में अधिक दिखाई देता है और ऐसे में रात में हादसा होने से बच सकता है। इसके साथ ही पेड़ों पर रंग करने से पेड़ों में दीमक और अन्य जीवजंतु नहीं आते और इस वजह से ही पेड़ लंबे समय तक खड़े रहते हैं।

Monday, August 19, 2019

मैन वर्सेस वाइल्ड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जंगल में होना इसकी सबसे रोमांचकारी बात नहीं है

अगर बराक ओबामा से तुलना करें तो ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ का नरेंद्र मोदी वाला एपिसोड रोमांच के मामले में ज्यादा नंबर बटोर लेता है। 

अगर मजे-मजे में इस आलेख की शुरूआत करनी हो तो कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी दुनिया के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो हिंदी बोलकर भी बेयर ग्रिल्स जैसे अंग्रेजों को अपनी बात समझा लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इस स्पेशल एपिसोड में ज्यादातर वक्त हिंदी में बात करते नज़र आते हैं। जब वे ऐसा कर रहे होते हैं, तब शो के एंकर बेयर ग्रिल्स सहमति में सिर हिलाते दिखाई देते हैं लेकिन उनका तरीका जरा बनावटी लगता है। इस पर भी अगर चुटकी लेने की इजाजत मिले तो हम कहना चाहेंगे कि हमारे प्रधानमंत्री इस शो में ग्रिल्स से कहीं बेहतर अभिनय करते नज़र आए हैं। 

‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इस एपिसोड में नरेंद्र मोदी और बेयर ग्रिल्स के अभिनय करने की बात गंभीरता से भी कही जा सकती है क्योंकि जानने वाले इस बात को जानते हैं कि ग्रिल्स को जरा भी हिंदी नहीं आती है। इसका सीधा मतलब है कि नरेंद्र मोदी को अनजानी रोमांचक यात्रा पर ले जाने का दावा करने वाले इस शो की बातचीत तक स्क्रिप्टेड थी। हालांकि मोदी जैसी हस्तियों के मामले में अक्सर ऐसा होता ही है। लेकिन इस शो में बिलकुल हिंदी न जानने वाले बेयर ग्रिल्स के साथ जिस सहजता से प्रधानमंत्री की बातचीत को दिखाया गया है वह कुछ लोगों को थोड़ा अटपटा लग सकता है। 


इस कार्यक्रम के एक बड़े हिस्से में बड़े इत्मीनान से मोदीजी, ग्रिल्स को बताते हैं कि उनका बचपन बेहद गरीबी में कटा, वे एक समय स्टेशन पर चाय बेचा करते थे और पढ़ाई में बहुत अच्छा न होने के बावजूद एक अनुशासित छात्र थे। इसके अलावा, बचपन में वे मगरमच्छ के बच्चे को घर उठा लाने की घटना भी सुनाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरुकता का संदेश देने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी, प्रकृति से जुड़े कुछ प्रभावित करने वाले किस्से भी बांटते हैं। मसलन, वे बताते हैं कि उनके पिता बारिश के आने पर चिट्ठी लिखकर लोगों को इसकी खबर दिया करते थे, यह प्रकृति के त्यौहार को मनाने का अनूठा तरीका कहा जा सकता है। साथ ही, वे ओस की बूंदों की वजह से जमी हुई नमक की परत से कपड़े धोने और नहाने की बात भी कहते हैं जो थोड़ी अजीब लगने के चलते आपका ध्यान खींचती है। इसके अलावा, वे कार्यक्रम के दौरान जानवरों से हिंसा ना करने और शाकाहारी होने की जरूरी बात भी कहते नज़र आते हैं। 

इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री, बेयर ग्रिल्स के केवल एक ही सवाल का उत्तर नहीं देते हैं। जब ग्रिल्स उनसे पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद वे खुद को क्या करते हुए देखते हैं, तो मोदी इसका जवाब देने की बजाय उनसे विदा ले लेते हैं। ऐसे में एक अंदेशा होता है कि शायद ग्रिल्स ने यह सवाल स्क्रिप्ट से अलग हटकर पूछ लिया था और नरेंद्र मोदी इसका जवाब कुछ विशेष कारणों से नहीं देना चाहते थे। क्योंकि इसके बाद चलते-चलते सेल्फी लेते हुए ग्रिल्स प्रधानमंत्री से उनके अंडरपैंट्स के सूखे होने के बारे में पूछते हैं तो मोदी बहुत हाजिर जवाबी से कहते हैं कि वे आज के दिन का काम चला लेंगे। 

इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अपने बचपन, हिमालय में गुजारे समय और राजनीति के बारे में बात करते हैं तो ज्यादातर वक्त लगभग वही बातें दोहराते हैं जो वे पहले भी कई बार कह चुके हैं। ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के बारे में दावा किया जाता है कि यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो दुनिया के 180 देशों में प्रसारित होता है। इसका मतलब है कि इसके दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजी बोलने-समझने वाले लोगों का होगा और उसे प्रधानमंत्री के बारे में ये सामान्य बातें भी नहीं मालूम होंगी। लेकिन अगर इन बातों को दोहराने का मकसद, इन्हें ऐसे दर्शकों तक पहुंचाना ही था तो फिर ये हिंदी में क्यों कही गईं? वह भी तब जब प्रधानमंत्री के बारे में यह बात प्रचारित रही है कि वे हिंदी और गुजराती के साथ, अंग्रेजी भी भली तरह से समझते और बोलते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इंटरनेशनल टेलीविजन पर सीधे अपनी बात पहुंचाने के बजाय पीएम मोदी ने यह काम अनुवादकों के जिम्मे क्यों छोड़ दिया? 

वे ऐसा क्यों करते हैं, इसका अंदाजा आपको थोड़े टेढ़े रास्ते से ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इसी एपिसोड से ही मिल जाता है। कार्यक्रम की शुरूआत में बेयर ग्रिल्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ‘उन्हें हाल ही में यूएन चैम्पियनशिप ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है।’ यहां पर ध्यान देने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह अवार्ड अक्टूबर-2018 में दिया गया था और यह कार्यक्रम फरवरी-2019 में शूट किया गया है। फरवरी में तो यह कहा जा सकता था कि अवॉर्ड ‘हाल ही में’ दिया गया है लेकिन अगस्त में इस बारे में जानकारी देते हुए कहा जाएगा कि यह अवॉर्ड ‘बीते साल’ अक्टूबर में दिया गया था। इससे अंदाजा लगता है कि यह कार्यक्रम न सिर्फ फरवरी-2019 में शूट किया था बल्कि इसे उसी समय यानी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रसारित किया जाना था। बहुत संभावना है कि शूटिंग वाले दिन ही पुलवामा हमला हो जाने के चलते, किसी विवाद से बचने के लिए इसका प्रसारण कुछ महीनों के लिए टाल दिया गया हो। अब चाहें तो सोच सकते हैं कि शायद इस कार्यक्रम के जरिये प्रधानमंत्री दुनिया भर के लोगों से अप्रत्यक्ष तरीके से और भारतीय जनता से सीधे तरीके से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी मैन वर्सेस वाइल्ड में शिरकत कर चुके हैं। अगर उनसे तुलना करें तो नरेंद्र मोदी वाला एपिसोड रोमांच के मामले में ज्यादा नंबर बटोर लेता है। इसमें प्रधानमंत्री चाकू से भाला बनाने और बांस की नाव पर लटकने में ग्रिल्स की मदद करते और उसके जरिए नदी पार करते दिखाई देते हैं। जबकि ओबामा वाले एपिसोड में ऐसा कोई दृश्य नहीं है। बातचीत के दौरान बराक ओबामा जहां बतौर राष्ट्रपति अपने जीवन के बारे में बहुत सहजता से बताते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि वे जंगल में बहुत सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी इसमें एक आदर्श निडर पुरुष के रूप में नजर आते हैं। इसके अलावा, अलास्का ग्लेशियर के संरक्षण की बात करने पहुंचे ओबामा कार्यक्रम के दौरान बहुत गंभीरता से इस पर चर्चा करते दिखते हैं, जबकि मोदी काफी हल्के-फुल्के तरीके से और भारतीय संस्कृति के उदाहरण देकर बताते हैं कि प्रकृति का संरक्षण तो हमारी परंपरा का हिस्सा है। 

Friday, August 16, 2019

स्वतंत्रता लोकतंत्र और गणतंत्र में क्या अंतर है

स्वतंत्रता बहुत व्यापक अवधारणा है। इसका सीधा मतलब है व्यक्ति का अपने कार्य-व्यवहार में स्वतंत्र होना पराधीन नहीं होना। व्यावहारिक अर्थ है ऐसी व्यवस्था में रहना जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता उसका मौलिक अधिकार हो। 

हज़ारों साल के मनुष्य जाति के इतिहास में हमने व्यक्ति के कुछ प्राकृतिक अधिकारों को स्वीकार किया है जैसे जीवन, विचरण भरण-पोषण, निवास वगैरह। इन प्राकृतिक अधिकारों को अतीत में राज-व्यवस्थाओं ने अपने लिखित-अलिखित कानूनों में स्थान देकर नागरिक अधिकार बनाया। 10 दिसम्बर 1948 को जारी संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार घोषणापत्र में इन अधिकारों को जगह दी। 

इन अधिकारों पर नजर डालेंगे तो आप पाएंगे कि दुनिया के नागरिकों को अभी उनके पूरे अधिकार प्राप्त नहीं हैं। सम्भव है कभी मिलें। 


लोकतंत्र एक व्यवस्था का नाम है, जिसकी एक संवैधानिक व्यवस्था भी हो। जब शासन पद्धति पर यह लागू हो तो शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक होती है। इसमें हिस्सा लेने वाले या तो आमराय से फैसले करते हैं और यदि ऐसा न हो तो मत-विभाजन से करते हैं। ये निर्णय सामान्य बहुमत से और कई बार ज़रूरी होने पर विशेष बहुमत से भी होते हैं। मसलन कुछ परिस्थितियों में दो तिहाई मत से भी निर्णय किए जाते हैं। 

गणतंत्र वह शासन पद्धति जहाँ राज्यप्रमुख का निर्वाचन सीधे जनता करे या जनता के प्रतिनिधि करें। यानी राष्ट्रप्रमुख वंशानुगत या तानाशाही तरीके से सत्ता पर कब्जा करके न आया हो। 

कुछ ऐसे देश भी हैं, जहाँ शासन पद्धति लोकतांत्रिक होती है, पर राष्ट्राध्यक्ष लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुना जाता। 

Monday, August 12, 2019

पूरे विश्व में बोली की संख्या कितनी?


दुनिया के हर देश में अलग अलग भाषा बोली जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में कुल कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं। इसका जवाब तो किसी के पास प्रमाणिक तौर पर नहीं है लेकिन लेकिन U.N. के अनुसार, दुनिया भर में बोली जाने वाली कुल भाषाएँ 6809 है।

वर्ष 2019 को संयुक्त राष्ट्र की स्थानीय भाषा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया है संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पापुआ न्यू गिनी में दुनिया की सबसे अधिक 840 स्वदेशी भाषाएँ बोली जाती है, जबकि भारत 453 भाषाओं के साथ चौथे स्थान पर है

हर किसी को लगता है कि अंग्रेजी और स्पेनिश भाषा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वास्तव में अंग्रेजी को बोलने वाले लोगों की संख्या चीन की मंदारिन भाषा से बहुत कम है। कुल आंकड़ों में अगर बात की जाए तो यह भाषा एक अरब से ज्यादा लोग बोलते हैं।

अंग्रेजी भाषा पूरे विश्व में अपनी पकड़ बना चुकी है मूल रूप से यह भाषा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में बोली जाती है। लेकिन लगभग पूरे विश्व में 508 मिलियन लोग इस भाषा का इस्तेमाल करते हैं यह दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से है।


पर भारत एक ऐसा देश हैं, जहां हर शहर नहीं, बल्कि हर गांव, हर जिले के साथ भाषा बदल जाती है। विभिन्न सभ्यता, संस्कृति के साथ भारत में लगभग 780 भाषाएं बोली जाती हैं।

भारत में 22 भाषाओं को आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है। जबकि मुख्य रूप से यहां सरकारी कामकाज की दो ही भाषा है, हिंदी व अंग्रेजी। हालांकि, हिंदी की उपयोगिता को लेकर राजनीतिक तौर पर समय समय पर विवाद उठता रहा है।

वहीं, संस्कृत को सभी भाषा की जनक के रूप में देखा जाता है। इसने कई भाषाओं को जन्म दिया है। लेकिन संस्कृत की तरह ही हर भाषा का अपना इतिहास, अपनी एक कहानी होती है। किसी भाषा की यात्रा मात्र साल दो साल की नहीं, सदियों की होती है। वहीं, यह काफी दिलचस्प भी होती है।
मराठी को योद्धाओं के भाषा के रूप में माना जाता है। भारत में मराठी मुख्य रूप से महाराष्ट्र में बोली जाती है।

मलयालम मुख्य रूप से भारत के केरल राज्य में बोली जाती है। जबकि दुनिया भर में 90 मिलियन से ज्यादा लोग मलयालम बोलते हैं।

भारत में हिंदी भाषा 77 प्रतिशत जनसंख्या द्वारा बोली जाती है। वहीं, विश्व भर में इसे 500 मिलियन से ज्यादा लोग बोलते हैं। यह भाषा दुनिया में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में चौथे स्थान पर आती है। इस भाषा को पूरे विश्व में 80 करोड लोग समझ सकते हैं। हिंदुस्तान में लगभग 45 करोड़ लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं।

कन्नड़ 2,500 वर्ष प्राचीन भाषा है। भारत में मुख्य रूप से यह कर्नाटक में बोली जाती है।

खरोष्ठी लिपि अब विलुप्त हो चुकी है। पहले यह गांधार क्षेत्र में बोली जाती थी। इसे भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की सबसे पुरानी लिपि में से एक माना गया है

भारत में तमिल बोलने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है। यह भाषा भारत के जड़ों में बसी है।
पंजाबी 750 AD and 1400 AD के बीच एक भिन्न भाषा के रूप में पहचाना गया। यह गुरुमुखी लिपि में लिखा जाता है।

उड़िया भारत की राज्यभाषा है। वहीं, पूरे विश्व भर में यह 35 मिलियन से ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है।

नेपाली भारत में पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम के की इलाकों में बोली जाती है। यह नेपाल की राष्ट्र भाषा है।

तेलुगु भाषा भारत में मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में बोली जाती है। 11वीं सदी में सबसे पहले तेलुगु साहित्य में 'महाभारत' लिखी गई थी।

विश्व भर में 210 मिलियन से ज्यादा लोग बंगाली बोलते हैं। भारत में प्रमुख रूप से यह पश्चिम बंगाल में बोला जाता है।

Wednesday, August 7, 2019

टीकाकरण क्या है?

आप लोग अक्सर यह सोचते होंगें कि टीका क्या है और क्यों हमारे शिशु को दिया जाता है। आखिर नवजात शिशु के जन्म के बाद टीके लगवाना क्यों आवश्यक होते है। तो हम आपको बता दें कि टीका एक जीवन रक्षक औषधि की तरह है जो आपके बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। 

टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू भी न सकें। बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है। 

टीकाकरण के प्रकार

वैक्सीनेशन के निम्न तीन प्रकार होते हैं। 

1. प्राथमिक टीकाकरण

नवजात शिशु संक्रामक रोगों से बचा रहें और उसके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो इसके लिए नवजात शिशु के जन्म के समय से ही प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है। समय समय पर दिए जाने वाले टीके बच्चे को कई जान लेवा बीमारियों से बचाते है इसलिए समय पर बच्चों को टीका अवश्य लगवाएं। 

2. बूस्टर टीकाकरण

बूस्टर खुराकें प्राथमिक टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। ताकि जिन शिशुओं में पहले टीके के बाद प्रतिरक्षण क्षमता विकसित नही हुई हो, उन्हें बूस्टर ख़ुराक़ देकर रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित की जाए ताकि शिशु हमेशा रोगों से बचा रहें। 

3. सार्वजनिक टीकाकरण

जब किसी जगह किसी विशेष बीमारी का भयावह रूप बच्चों पर दिखने लगता है तो उस बीमारी से सभी बच्चों की रक्षा के लिए और उस बीमारी को जड़ से ख़तम करने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। जैसे प्लस पोलियों अभियान सरकार के द्वारा पोलियो को जड़ से ख़तम करने के लिए चलाया गया और जनता के सहयोग से यह अभियान सफल रहा जिससे आज भारत पोलियो मुक्त बन चुका है। 

टीके देने का तरीक़ा

पोलियो के अतिरिक्‍त बाकि सभी टीके इंजेक्‍शन द्वारा दिये जाते हैं। सिर्फ़ पोलियो के टीके की दो बूंद बच्‍चे के मुंह में डालकर पिलाई जाती है।