Saturday, July 13, 2019

कविताओं में एक से नजर आने वाले सागर और समंदर में क्या फर्क होता है?

मशहूर गीतकार आनंद बख्शी के सालों पहले लोकप्रिय हुए एक गीत के बोल हैं, ‘सात समंदर पार से, गुड़ियों के बाजार से… अच्छी सी गुड़िया लाना... पप्पा जल्दी आ जाना’ यहां बख्शी साब ने एक बच्ची की मासूम-सी इच्छा बोलों में पिरोई है और जाहिर है कि एक कवि जब बच्चे की कल्पना में कुछ बोलेगा तो सात समुंदर क्या, उसके पिता को सात आसमान भी पार करा सकता है! 

लेकिन हकीकत समझें तो सात तो बहुत ही बड़ी बात है, एक भी समंदर पार कर पाना किसी के बस की बात नहीं, फिर चाहे आने वाला किसी का भी पप्पा क्यों न हो! 

हां, अगर कोई समुद्र पार करने की बात कहे तो वह जरूर हो सकता है| अब यहां पर अचानक ही एक सवाल जेहन में आ जाता है कि समुद्र (सागर) और समंदर (महासागर) क्या अलग-अलग हैं| 


सागर महासागरों से छोटे होते हैं| समुद्र या सागर असल में महासागर का वह हिस्सा होता है जो आंशिक रूप से जमीन से जुड़ा होता है| कई सागरों को खुद में समाने वाले महासागर, खारे पानी का एक बहुत बड़ा जल क्षेत्र होते हैं| 

वैसे तो धरती पर पांच अलग-अलग महासागर बताए जाते हैं| लेकिन ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं और धरती का लगभग तीन चौथाई हिस्सा घेरे हुए हैं| इन्हीं की बदौलत धरती पर अलग-अलग मौसम और जीवन संभव हो पाता है| इस तरह धरती का 71% हिस्सा घेरने वाले इन महासागरों में इस ग्रह पर मौजूद पानी का करीब 97% हिस्सा है| 

सागर और महासागर में एक बड़ा अंतर यह होता है कि महासागर, सागरों से कहीं ज्यादा गहरे होते हैं| सागर के तल की गहराई नापी जा सकती है जबकि महासागर की वास्तविक गहराई नाप पाना बहुत मुश्किल है| 

जहाँ समुद्रो में प्रयोगों के लिए पहुँचा जा सकता है, महासागरो में ऐसे कामो के लिए पहुचना कठिन होता है| महासागर ही ऐसा स्थान होता है जहाँ समुद्र अपने पानी को खाली करते है, जबकि महासागर अपने पानी की निकासी नहीं खोजते| समुद्र जो की भूमि के निकट होते है महासागरो की तुलना में कम गहरे होते है और इस कारण पौधे और जीव जंतुओ के लिए यहाँ फलना फूलना संभव होता है क्योकि ये आमतौर पर रोशनी से प्रकाशित होते है| जबकि महासागर जो की बहुत गहरे होते है यहाँ समुद्री जीवन का बचा रहना मुश्किल होता है क्योकि यहाँ रोशनी नहीं पहुँच पाती और दबाव भी अधिक होता है|

एक बार फिर से आकार पर लौटें तो सबसे बड़े महासागर, प्रशांत महासागर (पैसेफिक ओशन) का विस्तार करीब 6,41, 86,000 वर्ग मील तक फैला हुआ है जबकि सबसे बड़े सागर, भूमध्य सागर (मेडिटरेनियन सी) का क्षेत्रफल लगभग 11, 44,800 वर्ग मील है| आंकड़ों पर ही थोड़ा और गौर करें तो पता चलता है कि दुनिया का सबसे छोटा महासागर, आर्कटिक ओशन (54,27,000 वर्ग मील) भी सबसे बड़े सागर से करीब पांच गुना बड़ा है| लगे हाथ हिंद महासागर की भी बात करते चलें तो इसका विस्तार करीब 2,64,69,900 वर्ग मील तक है| 

अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत महासागर का सबसे गहरा क्षेत्र मारिआना ट्रेंच है जिसकी गहराई करीब 36,200 फीट मापी गई है, लेकिन वैज्ञानिक इसे प्रशांत महासागर की अधिकतम गहराई नहीं मानते| वहीं सबसे गहरे समुद्र, कैरेबियन सागर की गहराई करीब 22,788 फीट बताई जाती है| औसतन महासागरों की गहराई करीब 3,953 फीट से 15,215 फीट के बीच होती है|





Tuesday, July 2, 2019

प्रधानमंत्री आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस या EWS) और लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी या LIG) को मिलने वाली क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (ब्याज सब्सिडी) का फायदा अगले साल तक उठाया जा सकता है| 

दरअसल सरकार ने PMAY को 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दिया है| PMAY के तहत पहला घर बनाने या खरीदने के लिए होम लोन (Home Loan) पर ब्याज सब्सिडी का फायदा उठाया जा सकता है| होम लोन (Home Loan) के ब्याज पर 2.60 लाख रुपये का फायदा कमजोर आय वर्ग के लोग उठा सकते हैं| में खत्म हो रही थी| 


जिन लोगों की आमदनी तीन लाख रुपये सालाना से कम है वे EWS कैटेगरी में आते हैं| छह लाख रुपये सालाना तक कमाने वाले लोग LIG में आते हैं| इन दोनों कैटेगरी में PMAY के तहत छह लाख रुपये तक के लोन पर 6.5 फीसदी तक ब्याज सब्सिडी का फायदा उठाया जा सकता है| 

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सबके लिए घर-2022 के तहत सरकार ने CLSS शुरू की थी| बाद में इसे बढ़ाकर छह लाख से 12 लाख रुपये सालाना और 12 से 18 लाख रुपये सालाना तक की आमदनी वाले लोगों तक भी कर दिया गया था| 

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) में मध्यम आय वर्ग के ऐसे लोगों को जिनकी सालाना आय 6 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, उन्हें 9 लाख रुपये के 20 साल अवधि वाले होम लोन (Home Loan) पर 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी| 

मसलन होम लोन (Home Loan) पर ब्याज की दर 9 फीसदी है तो आपको PMAY के तहत यह 5 फीसदी ही चुकानी होगी| 12 लाख से 18 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी| 
बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक और बहुत से संस्थान इस योजना का लाभ ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं| नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) और हुडको (HUDCO) भी इस योजना में शामिल हैं|

Saturday, June 29, 2019

पाईथागोरस

य़ोरुप में विद्या के आधुनिकीकरण की नींव पाईथागोरस ने भारतीय गणित को यूनान में प्रसारित कर के डाली थी। पाईथागोरस की जीवनी उस की मृत्यु के लगभग दो शताब्दी पश्चात टुकडों में उजागर हुयी जिस से पता चलता है कि उस का जन्म ईसा से 560 वर्ष पूर्व ऐशिया माईनर के ऐक दूीप सामोस पर हुआ था। संगीत और जिमनास्टिक की प्रारम्भिक शिक्षा के बाद वह मिस्त्र चला गया और बेबीलोन तथा उस के आसपास के क्षेत्रों में कुछ काल तक रहा था। उस क्षेत्र में भारतीय दर्शन ज्ञान, उपनिष्दों, गणित तथा रेखागणित का प्रसार और प्रभाव था सिकन्द्रीया विश्वविद्यालय स्थापित होने से पूर्व ही था। भारतीय संगीत के धरातल पर ही पाईथागोरस ने पाशचात्य संगीत पद्धति की आधार शिला बनाई थी। 


जब पाईथागोरस भारतीय प्रभाव के क्षेत्र में था तब ईरान ने मिस्त्र पर आक्रमण किया। पाईथागोरस को भी बन्दियों के साथ ईरान ले जाया गया । कालान्तर पाईथागोरस ईरान से पंजाब तक भारत में भी गया जहाँ उस ने यूनानी रीति रिवाज और वस्त्र त्याग कर भारत के पहाडी ढंग के टराउजर्स की तरह के परिधान अपना लिये थे। उसी तरह का परिधान पहने महारज कनिष्क को भी ऐक प्रतिमा में दिखाया गया है जो अफगानिस्तान में पाई गई थी। प्रतिमा में सम्राट कनिष्क को डबल ब्रेस्टिड कोट के साथ टराउजर्स पहने दिखाया गया है। यूनान में उस समय तक टराउजर्स नहीं पहनी जाती थीँ। टराउजर्स की ही तरह के पायजामे और सलवारें भारत ईरान घाटी में पहने जाते थे। अतः पाईथागोरस ने भारतीय रेखागणित के साथ साथ भारतीय वेश भूषा भी योरुप में प्रचिल्लत की थी।

Thursday, June 27, 2019

रमणीय स्थल : खजुराहो

खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। यह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। खजुराहो को प्राचीन काल में 'खजूरपुरा' और 'खजूर वाहिका' के नाम से भी जाना जाता था। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर हैं। मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़े हुए पत्थरों से निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक और पर्यटक प्रेम के इस अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक को देखने के लिए निरंतर आते रहते है। हिन्दू कला और संस्कृति को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था। 

खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है। यह शहर चन्देल साम्राज्‍य की प्रथम राजधानी था। चन्देल वंश और खजुराहो के संस्थापक चन्द्रवर्मन थे। चन्द्रवर्मन मध्यकाल में बुंदेलखंड में शासन करने वाले गुर्जर राजा थे। वे अपने आप को चन्द्रवंशी मानते थे। चंदेल राजाओं ने दसवीं से बारहवी शताब्दी तक मध्य भारत में शासन किया। खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 ईसवीं से 1050 ईसवीं के बीच इन्हीं चन्देल राजाओं द्वारा किया गया। मंदिरों के निर्माण के बाद चन्देलो ने अपनी राजधानी महोबा स्थानांतरित कर दी। लेकिन इसके बाद भी खजुराहो का महत्व बना रहा। 


मध्यकाल के दरबारी कवि चंदबरदाई ने पृथ्वीराज रासो के महोबा खंड में चन्देल की उत्पत्ति का वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है कि काशी के राजपंडित की पुत्री हेमवती अपूर्व सौंदर्य की स्वामिनी थी। एक दिन वह गर्मियों की रात में कमल-पुष्पों से भरे हुए तालाब में स्नान कर रही थी। उसकी सुंदरता देखकर भगवान चन्द्र उन पर मोहित हो गए। वे मानव रूप धारणकर धरती पर आ गए और हेमवती का हरण कर लिया। दुर्भाग्य से हेमवती विधवा थी। वह एक बच्चे की मां थी। उन्होंने चन्द्रदेव पर अपना जीवन नष्ट करने और चरित्र हनन का आरोप लगाया। 

अपनी गलती के पश्चाताप के लिए चन्द्र देव ने हेमवती को वचन दिया कि वह एक वीर पुत्र की मां बनेगी। चन्द्रदेव ने कहा कि वह अपने पुत्र को खजूरपुरा ले जाए। उन्होंने कहा कि वह एक महान राजा बनेगा। राजा बनने पर वह बाग और झीलों से घिरे हुए अनेक मंदिरों का निर्माण करवाएगा। चन्द्रदेव ने हेमवती से कहा कि राजा बनने पर तुम्हारा पुत्र एक विशाल यज्ञ का आयोजन करगा जिससे तुम्हारे सारे पाप धुल जाएंगे। चन्द्र के निर्देशों का पालन कर हेमवती ने पुत्र को जन्म देने के लिए अपना घर छोड़ दिया और एक छोटे-से गांव में पुत्र को जन्म दिया। 

हेमवती का पुत्र चन्द्रवर्मन अपने पिता के समान तेजस्वी, बहादुर और शक्तिशाली था। सोलह साल की उम्र में वह बिना हथियार के शेर या बाघ को मार सकता था। पुत्र की असाधारण वीरता को देखकर हेमवती ने चन्द्रदेव की आराधना की जिन्होंने चन्द्रवर्मन को पारस पत्थर भेंट किया और उसे खजुराहो का राजा बनाया। पारस पत्थर से लोहे को सोने में बदला जा सकता था। 

चन्द्रवर्मन ने लगातार कई युद्धों में शानदार विजय प्राप्त की। उसने कालिंजर का विशाल किला बनवाया। मां के कहने पर चन्द्रवर्मन ने तालाबों और उद्यानों से आच्छादित खजुराहो में 85 अद्वितीय मंदिरों का निर्माण करवाया और एक यज्ञ का आयोजन किया जिसने हेमवती को पापमुक्त कर दिया। चन्द्रवर्मन और उसके उत्तराधिकारियों ने खजुराहो में अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया। 

जब ब्रिटिश इंजीनियर टी एस बर्ट ने खजुराहो के मंदिरों की खोज की है तब से मंदिरों के एक विशाल समूह को 'पश्चिमी समूह' के नाम से जाना जाता है। यह खजुराहो के सबसे आकर्षक स्थानों में से एक है। इस स्थान को युनेस्को ने 1986 में विश्व विरासत की सूची में शामिल भी किया है। 

इस परिसर के विशाल मंदिरों की बहुत ज्यादा सजावट की गई है। यह सजावट यहां के शासकों की संपन्नता और शक्ति को प्रकट करती है। इतिहासकारों का मत है कि इनमें हिन्दू देवकुलों के प्रति भक्ति भाव दर्शाया गया है। देवकुलों के रूप में या तो शिव या विष्णु को दर्शाया गया है। इस परिसर में स्थित लक्ष्मण मंदिर उच्च कोटि का मंदिर है। इसमें भगवान विष्णु को बैकुंठम के समान बैठा हुआ दिखाया गया है। चार फुट ऊंची विष्णु की इस मूर्ति में तीन सिर हैं। ये सिर मनुष्य, सिंह और वराह के रूप में दर्शाए गए हैं। कहा जाता है कि कश्मीर के चम्बा क्षेत्र से इसे मंगवाया गया था। इसके तल के बाएं हिस्से में आमलोगों के प्रतिदिन के जीवन के क्रियाकलापों, कूच करती हुई सेना, घरेलू जीवन तथा नृतकों को दिखाया गया है। 

मंदिर के प्लेटफार्म की चार सहायक वेदियां हैं। 954 ईसवीं में बने इस मंदिर का संबंध तांत्रिक संप्रदाय से है। इसका अग्रभाग दो प्रकार की मूर्तिकलाओं से सजा है जिसके मध्य खंड में मिथुन या आलिंगन करते हुए दंपत्तियों को दर्शाता है। मंदिर के सामने दो लघु वेदियां हैं। एक देवी और दूसरा वराह देव को समर्पित है। विशाल वराह की आकृति पीले पत्थर की चट्टान के एकल खंड में बनी है।

Tuesday, June 25, 2019

हात्मा गांधी की समाधि : राजघाट


स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि दी जाती है। भारत की आजादी में महात्मा गांधी का बड़ा योगदान था। राजघाट वो जगह है जहां महात्मा गांधी की समाधि बनाई गई है। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक देश के बड़े नेता यहां बापू को श्रद्धांजलि देने आते हैं।
  • महात्मा गांधी की समाधि काले पत्थर से बनाई गई है जिस स्थान पर यह समाधि बनाई है वहीं महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। इस समाधि के साथ में ही एक ज्योति हमेशा जलती रहती है।
  • राजघाट दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित है यहां दो संग्रहालय है जो आपको पुराने समय में वापस ले जाएंगे अगर आप राजघाट जा रहे हैं तो इन संग्रहालय को भी देखने जरूर जाएं। यह संग्रहालय आपको भारत की आजादी से जुड़े प्रत्येक पहलू से रूबरू कराएंगे।
  • राजघाट एक बडे़ क्षेत्र में फैला है यहां दुनिया की कई बड़ी हस्तियों ने पेड़ लगाए हैं जिसमें क्वीन एलिजाबेथ-2, अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर और वियतनाम के बड़े नेता हो-ची-मिन शामिल हैं।
  • राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि के अलावा देश के दूसरे बड़े नेताओं की समाधि भी है। राजघाट के उत्तर में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की समाधि शांतिवन स्थित है।
  • भारत के प्रधानमंत्री रजीव गांधी की समाधि भी राजघाट के उत्तर में स्थित है। राजीव गांधी की 1991 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
  • राजघाट के पास ही के आर नारायण मेमोरियल एकता स्थल, लाल बहादुर शास्त्री का मेमोरियल शक्ति स्थल भी स्थित है।