Friday, August 16, 2019

स्वतंत्रता लोकतंत्र और गणतंत्र में क्या अंतर है

स्वतंत्रता बहुत व्यापक अवधारणा है। इसका सीधा मतलब है व्यक्ति का अपने कार्य-व्यवहार में स्वतंत्र होना पराधीन नहीं होना। व्यावहारिक अर्थ है ऐसी व्यवस्था में रहना जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता उसका मौलिक अधिकार हो। 

हज़ारों साल के मनुष्य जाति के इतिहास में हमने व्यक्ति के कुछ प्राकृतिक अधिकारों को स्वीकार किया है जैसे जीवन, विचरण भरण-पोषण, निवास वगैरह। इन प्राकृतिक अधिकारों को अतीत में राज-व्यवस्थाओं ने अपने लिखित-अलिखित कानूनों में स्थान देकर नागरिक अधिकार बनाया। 10 दिसम्बर 1948 को जारी संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार घोषणापत्र में इन अधिकारों को जगह दी। 

इन अधिकारों पर नजर डालेंगे तो आप पाएंगे कि दुनिया के नागरिकों को अभी उनके पूरे अधिकार प्राप्त नहीं हैं। सम्भव है कभी मिलें। 


लोकतंत्र एक व्यवस्था का नाम है, जिसकी एक संवैधानिक व्यवस्था भी हो। जब शासन पद्धति पर यह लागू हो तो शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक होती है। इसमें हिस्सा लेने वाले या तो आमराय से फैसले करते हैं और यदि ऐसा न हो तो मत-विभाजन से करते हैं। ये निर्णय सामान्य बहुमत से और कई बार ज़रूरी होने पर विशेष बहुमत से भी होते हैं। मसलन कुछ परिस्थितियों में दो तिहाई मत से भी निर्णय किए जाते हैं। 

गणतंत्र वह शासन पद्धति जहाँ राज्यप्रमुख का निर्वाचन सीधे जनता करे या जनता के प्रतिनिधि करें। यानी राष्ट्रप्रमुख वंशानुगत या तानाशाही तरीके से सत्ता पर कब्जा करके न आया हो। 

कुछ ऐसे देश भी हैं, जहाँ शासन पद्धति लोकतांत्रिक होती है, पर राष्ट्राध्यक्ष लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुना जाता। 

Monday, August 12, 2019

पूरे विश्व में बोली की संख्या कितनी?


दुनिया के हर देश में अलग अलग भाषा बोली जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में कुल कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं। इसका जवाब तो किसी के पास प्रमाणिक तौर पर नहीं है लेकिन लेकिन U.N. के अनुसार, दुनिया भर में बोली जाने वाली कुल भाषाएँ 6809 है।

वर्ष 2019 को संयुक्त राष्ट्र की स्थानीय भाषा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया है संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पापुआ न्यू गिनी में दुनिया की सबसे अधिक 840 स्वदेशी भाषाएँ बोली जाती है, जबकि भारत 453 भाषाओं के साथ चौथे स्थान पर है

हर किसी को लगता है कि अंग्रेजी और स्पेनिश भाषा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वास्तव में अंग्रेजी को बोलने वाले लोगों की संख्या चीन की मंदारिन भाषा से बहुत कम है। कुल आंकड़ों में अगर बात की जाए तो यह भाषा एक अरब से ज्यादा लोग बोलते हैं।

अंग्रेजी भाषा पूरे विश्व में अपनी पकड़ बना चुकी है मूल रूप से यह भाषा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में बोली जाती है। लेकिन लगभग पूरे विश्व में 508 मिलियन लोग इस भाषा का इस्तेमाल करते हैं यह दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से है।


पर भारत एक ऐसा देश हैं, जहां हर शहर नहीं, बल्कि हर गांव, हर जिले के साथ भाषा बदल जाती है। विभिन्न सभ्यता, संस्कृति के साथ भारत में लगभग 780 भाषाएं बोली जाती हैं।

भारत में 22 भाषाओं को आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है। जबकि मुख्य रूप से यहां सरकारी कामकाज की दो ही भाषा है, हिंदी व अंग्रेजी। हालांकि, हिंदी की उपयोगिता को लेकर राजनीतिक तौर पर समय समय पर विवाद उठता रहा है।

वहीं, संस्कृत को सभी भाषा की जनक के रूप में देखा जाता है। इसने कई भाषाओं को जन्म दिया है। लेकिन संस्कृत की तरह ही हर भाषा का अपना इतिहास, अपनी एक कहानी होती है। किसी भाषा की यात्रा मात्र साल दो साल की नहीं, सदियों की होती है। वहीं, यह काफी दिलचस्प भी होती है।
मराठी को योद्धाओं के भाषा के रूप में माना जाता है। भारत में मराठी मुख्य रूप से महाराष्ट्र में बोली जाती है।

मलयालम मुख्य रूप से भारत के केरल राज्य में बोली जाती है। जबकि दुनिया भर में 90 मिलियन से ज्यादा लोग मलयालम बोलते हैं।

भारत में हिंदी भाषा 77 प्रतिशत जनसंख्या द्वारा बोली जाती है। वहीं, विश्व भर में इसे 500 मिलियन से ज्यादा लोग बोलते हैं। यह भाषा दुनिया में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में चौथे स्थान पर आती है। इस भाषा को पूरे विश्व में 80 करोड लोग समझ सकते हैं। हिंदुस्तान में लगभग 45 करोड़ लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं।

कन्नड़ 2,500 वर्ष प्राचीन भाषा है। भारत में मुख्य रूप से यह कर्नाटक में बोली जाती है।

खरोष्ठी लिपि अब विलुप्त हो चुकी है। पहले यह गांधार क्षेत्र में बोली जाती थी। इसे भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की सबसे पुरानी लिपि में से एक माना गया है

भारत में तमिल बोलने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है। यह भाषा भारत के जड़ों में बसी है।
पंजाबी 750 AD and 1400 AD के बीच एक भिन्न भाषा के रूप में पहचाना गया। यह गुरुमुखी लिपि में लिखा जाता है।

उड़िया भारत की राज्यभाषा है। वहीं, पूरे विश्व भर में यह 35 मिलियन से ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है।

नेपाली भारत में पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम के की इलाकों में बोली जाती है। यह नेपाल की राष्ट्र भाषा है।

तेलुगु भाषा भारत में मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में बोली जाती है। 11वीं सदी में सबसे पहले तेलुगु साहित्य में 'महाभारत' लिखी गई थी।

विश्व भर में 210 मिलियन से ज्यादा लोग बंगाली बोलते हैं। भारत में प्रमुख रूप से यह पश्चिम बंगाल में बोला जाता है।

Wednesday, August 7, 2019

टीकाकरण क्या है?

आप लोग अक्सर यह सोचते होंगें कि टीका क्या है और क्यों हमारे शिशु को दिया जाता है। आखिर नवजात शिशु के जन्म के बाद टीके लगवाना क्यों आवश्यक होते है। तो हम आपको बता दें कि टीका एक जीवन रक्षक औषधि की तरह है जो आपके बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। 

टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू भी न सकें। बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है। 

टीकाकरण के प्रकार

वैक्सीनेशन के निम्न तीन प्रकार होते हैं। 

1. प्राथमिक टीकाकरण

नवजात शिशु संक्रामक रोगों से बचा रहें और उसके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो इसके लिए नवजात शिशु के जन्म के समय से ही प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है। समय समय पर दिए जाने वाले टीके बच्चे को कई जान लेवा बीमारियों से बचाते है इसलिए समय पर बच्चों को टीका अवश्य लगवाएं। 

2. बूस्टर टीकाकरण

बूस्टर खुराकें प्राथमिक टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। ताकि जिन शिशुओं में पहले टीके के बाद प्रतिरक्षण क्षमता विकसित नही हुई हो, उन्हें बूस्टर ख़ुराक़ देकर रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित की जाए ताकि शिशु हमेशा रोगों से बचा रहें। 

3. सार्वजनिक टीकाकरण

जब किसी जगह किसी विशेष बीमारी का भयावह रूप बच्चों पर दिखने लगता है तो उस बीमारी से सभी बच्चों की रक्षा के लिए और उस बीमारी को जड़ से ख़तम करने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। जैसे प्लस पोलियों अभियान सरकार के द्वारा पोलियो को जड़ से ख़तम करने के लिए चलाया गया और जनता के सहयोग से यह अभियान सफल रहा जिससे आज भारत पोलियो मुक्त बन चुका है। 

टीके देने का तरीक़ा

पोलियो के अतिरिक्‍त बाकि सभी टीके इंजेक्‍शन द्वारा दिये जाते हैं। सिर्फ़ पोलियो के टीके की दो बूंद बच्‍चे के मुंह में डालकर पिलाई जाती है।

Monday, August 5, 2019

धारा-370 क्या है?

धारा-370 का खात्मा हो गया है और इसके खत्म होते ही देश की राजनीति में हंगामा मच गया है। जहां कुछ राजनेता इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं। वहीं ज्यादातर विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। जानकारों का भी मानना है कि धारा-370 खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर सही मायनों में भारत का अभिन्न अंग हो गया है।
क्या है धारा 370
धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद यानी धारा है। जो जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार या विशेष दर्ज़ा देती है। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था।
राजा हरि सिंह ने रखा था प्रस्ताव
देश आजाद होने के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया गया था। जब जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई तभी पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने वहां आक्रमण कर दिया। कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह ने ही कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा था।
धारा 306ए से बनी थी धारा 370
उस समय कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का वक्त नहीं था। इसी हालात को देखते हुए संघीय संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप प्रस्तुत किया था, जो बाद में धारा 370 बन गई। जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिले हैं।
देश के अन्य राज्यों के लोगों के लिए ये बहुत बड़ी खुशखबरी है, जिसका इंतजार देश को आजादी के बाद से ही था। धारा-370 हटने से कश्मीर में ये 10 बड़े परिवर्तन हुए हैं :
1. अब जम्मू-कश्मीर में अब कोई भेदभाव नहीं होगा, देश के अन्य राज्यों के लोग भी वहां जमीन लेकर बस सकेंगे।
2. कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा। मतलब वहां भी अब तिरंगा शान से लहराएगा।
3. धारा-370 के साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान भी इतिहास बन गया है। अब वहां भी भारत का संविधान लागू होगा।
4. जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों की दोहरी नागरिकता समाप्त हो जाएगी।
5. जम्मू-कश्मीर के दो टुकड़े कर दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग राज्य होंगे।
6. दोनों नए राज्य जम्मू-कश्मीर व लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होंगे।
7. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। मतलब जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार बनेगी, लेकिन लद्दाख की कोई स्थानीय सरकार नहीं होगी।
8. जम्मू-कश्मीर की लड़कियों को अब दूसरे राज्य के लोगों से भी शादी करने की स्वतंत्रता होगी। दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।
9. धारा-370 में पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था।
10. धारा-370 को खत्म करने की मंजूरी राष्ट्रपति ने पहले ही दे दी थी। दरअसल ये अनुच्छेद पूर्व में राष्ट्रपति द्वारा ही लागू किया गया था। इसलिए इसे खत्म करने के लिए संसद से पारित कराने की आवश्यकता नहीं थी।

Saturday, August 3, 2019

ट्यूबलाईट देरी से क्यों जलती हैं?

ऐसा इसलिए है क्योंकि एक स्टार्टर, जो capacitor होता है, चार्ज किया जाना चाहिए और फिर यह ट्यूब में गैस को आयनीकृत करता है। इस प्रक्रिया में पहली बार समय लगता है।


आइए देखें कि ट्यूबलटाइट कैसे काम करता है: 

फ्लोरोसेंट ट्यूब एक कम दबाव वाला पारा-वाष्प गैस-निर्वहन लैंप है जो दृश्य प्रकाश उत्पन्न करने के लिए फ्लोरोसेंस का उपयोग करता है। गैस में एक विद्युत प्रवाह पारा वाष्प को उत्तेजित करता है, जो शॉर्ट-वेव पराबैंगनी प्रकाश उत्पन्न करता है जो तब दीपक के अंदर चमकने के लिए फॉस्फर कोटिंग का कारण बनता है। 

स्टार्टर: एक स्टार्टर वास्तव में फ्लोरोसेंट दीपक के साथ समानांतर में जुड़ा एक capacitor होता है। 

स्टार्टर चार्ज करने और गैस को आयनित करने में समय लगता है। 

यह भी वही कारण है कि यदि आप इसे बंद कर देते हैं और इसे वापस चालू करते हैं, तो यह जल्दी से रोशनी करता है। 

ऐसा इसलिए है क्योंकि गैस पहले ही आयनित है। 

विभिन्न गैसों (Neon) और जैसे विभिन्न रंगों के साथ कई प्रकार के ट्यूबलाइट्स हैं।