Tuesday, July 23, 2019

ऑस्कर पुरस्कार में जो मूर्ति दी जाती है वह किस महापुरुष की होती है?


किसी की नहीं| सन 1927 में ऐकेडमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स ऐंड साइन्सिस की बैठक में जब ट्रोफ़ी के डिज़ाइन पर चर्चा हुई तो लॉस ऐन्जिलिस के कई कलाकारों से अपने अपने डिज़ाइन सामने रखने को कहा गया| और पसन्द की गई मूर्तिकार जॉर्ज स्टैनली की प्रतिमा| इसमें फ़िल्म की रील पर खड़े एक आदमी को हाथ में एक तलवार पकड़े दिखाया गया है|


1929 से अब तक दो हज़ार से ज़्यादा ऑस्कर ट्रोफ़ियां दी जा चुकी हैं| इनका निर्माण कार्य शिकागो की आर एस ओएन्स ऐंड कम्पनी के सुपुर्द है और उन्हे पचास प्रतिमाएं बनाने में तीन से चार सप्ताह का समय लगता है| शुरु में यह प्रतिमा तांबे की बनती थी क्योंकि विश्व युद्ध के दौरान धातु की कमी थी, लेकिन अब यह सोने का पानी चढ़े ब्रिटैनियम से बनती है| ऑस्कर ट्रोफ़ी तेरह इंच लम्बी होती है और इसका वज़न है आठ पाउन्ड|

Thursday, July 18, 2019

ऐसे कैसे लिखा जाता है इतिहास और यह है इसके अध्यन के स्रोत

हमे बचपन से ही इतिहास पढाया और सुनाया जाता है| ये कहना भी गलत नहीं होगा की यह हम सभी को बोरिंग सब्जेक्ट लगता था क्योकि इतिहास की घटनाओ की तारीखे याद करना बहुत मुश्किल होता है, अगर ध्यान से देखा जाये तो इतिहास एक रोचक सब्जेक्ट भी है| इसके जरिये हम अपने अतीत को समझते है और उससे कई तरह की चीजे सीखते भी है। 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की इतिहासकारों को इतने समय पहली घटी घटनाओ का कैसे पता चल जाता है? कैसे आज से 5000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता के रहन सहन, पहनावे, धार्मिक जीवन, कृषि एवं पशुपालन, उद्योग-धंधे, व्यापार और पतन के बारे में इतिहासकार इतने सटीक दावे करते है? अगर नहीं, तो जानते है यह द्वारा.... 


इतिहास को जानने, समझे और इसका अध्ययन करने के लिए 2 प्रकार के स्त्रोतो का सहारा लिया जाता है – साहित्यिक और पुरातात्विक स्रोत| साहित्यिक स्रोतों से प्राचीन काल के सामाजिक जीवन, धार्मिक जीवन, रहन सेहन, सांस्कृतिक जीवन की जानकारी प्राप्त होती है| 

साहित्यिक स्रोत वह लिखित प्रमाण होते है जिनकी रचना उस काल में होती है जिसका अध्यन किया जा रहा हो| साहित्यिक स्त्रोतो में कई तरह की चीजे शामिल होती है जैसे मौलिक दस्तावेज, राजकीय रिकॉर्ड, पांडुलिपि, कविता, नाटक, संगीत, कला आदि| इतिहासकार इन्ही की मदद से उस काल या समय की जानकारी जुटाते है| उदहारण के तौर पर मोर्यकाल की जानकारी का सबसे अच्छा स्रोत कोटिल्य का अर्थशास्त्र माना जाता है| वही दक्षिण भारत के इतिहास को जानने का सर्वोतम स्रोत संगम साहित्य है| 

इतिहास के अध्यन के लिए पुरातात्विक स्रोतों का भी बहुत महत्व है| इनमे अभिलेख, सिक्के, मुहरों, स्तूपों, चट्टानों, स्मारक और भवनों, मूर्तियों, चित्रकला और अन्य अवशेषों को रखा जाता है| हड़प्पा सभ्यता की जानकरी हमें पुरातात्विक स्रोतों से प्राप्त होती है| मोहें-जो-दड़ो से प्राप्त मुहरो के आधार पर ही इतिहासकारों ने हड़प्पा सभ्यता के धर्मिक जीवन पर प्रकाश डाला| इसी तरह कई तरह के स्मारकों से जहा उस समय की जीवन शैली का ज्ञान होता है वही उनके निर्माता के बारे में भी सूचनाये मिल जाती है|

Saturday, July 13, 2019

कविताओं में एक से नजर आने वाले सागर और समंदर में क्या फर्क होता है?

मशहूर गीतकार आनंद बख्शी के सालों पहले लोकप्रिय हुए एक गीत के बोल हैं, ‘सात समंदर पार से, गुड़ियों के बाजार से… अच्छी सी गुड़िया लाना... पप्पा जल्दी आ जाना’ यहां बख्शी साब ने एक बच्ची की मासूम-सी इच्छा बोलों में पिरोई है और जाहिर है कि एक कवि जब बच्चे की कल्पना में कुछ बोलेगा तो सात समुंदर क्या, उसके पिता को सात आसमान भी पार करा सकता है! 

लेकिन हकीकत समझें तो सात तो बहुत ही बड़ी बात है, एक भी समंदर पार कर पाना किसी के बस की बात नहीं, फिर चाहे आने वाला किसी का भी पप्पा क्यों न हो! 

हां, अगर कोई समुद्र पार करने की बात कहे तो वह जरूर हो सकता है| अब यहां पर अचानक ही एक सवाल जेहन में आ जाता है कि समुद्र (सागर) और समंदर (महासागर) क्या अलग-अलग हैं| 


सागर महासागरों से छोटे होते हैं| समुद्र या सागर असल में महासागर का वह हिस्सा होता है जो आंशिक रूप से जमीन से जुड़ा होता है| कई सागरों को खुद में समाने वाले महासागर, खारे पानी का एक बहुत बड़ा जल क्षेत्र होते हैं| 

वैसे तो धरती पर पांच अलग-अलग महासागर बताए जाते हैं| लेकिन ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं और धरती का लगभग तीन चौथाई हिस्सा घेरे हुए हैं| इन्हीं की बदौलत धरती पर अलग-अलग मौसम और जीवन संभव हो पाता है| इस तरह धरती का 71% हिस्सा घेरने वाले इन महासागरों में इस ग्रह पर मौजूद पानी का करीब 97% हिस्सा है| 

सागर और महासागर में एक बड़ा अंतर यह होता है कि महासागर, सागरों से कहीं ज्यादा गहरे होते हैं| सागर के तल की गहराई नापी जा सकती है जबकि महासागर की वास्तविक गहराई नाप पाना बहुत मुश्किल है| 

जहाँ समुद्रो में प्रयोगों के लिए पहुँचा जा सकता है, महासागरो में ऐसे कामो के लिए पहुचना कठिन होता है| महासागर ही ऐसा स्थान होता है जहाँ समुद्र अपने पानी को खाली करते है, जबकि महासागर अपने पानी की निकासी नहीं खोजते| समुद्र जो की भूमि के निकट होते है महासागरो की तुलना में कम गहरे होते है और इस कारण पौधे और जीव जंतुओ के लिए यहाँ फलना फूलना संभव होता है क्योकि ये आमतौर पर रोशनी से प्रकाशित होते है| जबकि महासागर जो की बहुत गहरे होते है यहाँ समुद्री जीवन का बचा रहना मुश्किल होता है क्योकि यहाँ रोशनी नहीं पहुँच पाती और दबाव भी अधिक होता है|

एक बार फिर से आकार पर लौटें तो सबसे बड़े महासागर, प्रशांत महासागर (पैसेफिक ओशन) का विस्तार करीब 6,41, 86,000 वर्ग मील तक फैला हुआ है जबकि सबसे बड़े सागर, भूमध्य सागर (मेडिटरेनियन सी) का क्षेत्रफल लगभग 11, 44,800 वर्ग मील है| आंकड़ों पर ही थोड़ा और गौर करें तो पता चलता है कि दुनिया का सबसे छोटा महासागर, आर्कटिक ओशन (54,27,000 वर्ग मील) भी सबसे बड़े सागर से करीब पांच गुना बड़ा है| लगे हाथ हिंद महासागर की भी बात करते चलें तो इसका विस्तार करीब 2,64,69,900 वर्ग मील तक है| 

अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत महासागर का सबसे गहरा क्षेत्र मारिआना ट्रेंच है जिसकी गहराई करीब 36,200 फीट मापी गई है, लेकिन वैज्ञानिक इसे प्रशांत महासागर की अधिकतम गहराई नहीं मानते| वहीं सबसे गहरे समुद्र, कैरेबियन सागर की गहराई करीब 22,788 फीट बताई जाती है| औसतन महासागरों की गहराई करीब 3,953 फीट से 15,215 फीट के बीच होती है|





Tuesday, July 2, 2019

प्रधानमंत्री आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस या EWS) और लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी या LIG) को मिलने वाली क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (ब्याज सब्सिडी) का फायदा अगले साल तक उठाया जा सकता है| 

दरअसल सरकार ने PMAY को 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दिया है| PMAY के तहत पहला घर बनाने या खरीदने के लिए होम लोन (Home Loan) पर ब्याज सब्सिडी का फायदा उठाया जा सकता है| होम लोन (Home Loan) के ब्याज पर 2.60 लाख रुपये का फायदा कमजोर आय वर्ग के लोग उठा सकते हैं| में खत्म हो रही थी| 


जिन लोगों की आमदनी तीन लाख रुपये सालाना से कम है वे EWS कैटेगरी में आते हैं| छह लाख रुपये सालाना तक कमाने वाले लोग LIG में आते हैं| इन दोनों कैटेगरी में PMAY के तहत छह लाख रुपये तक के लोन पर 6.5 फीसदी तक ब्याज सब्सिडी का फायदा उठाया जा सकता है| 

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सबके लिए घर-2022 के तहत सरकार ने CLSS शुरू की थी| बाद में इसे बढ़ाकर छह लाख से 12 लाख रुपये सालाना और 12 से 18 लाख रुपये सालाना तक की आमदनी वाले लोगों तक भी कर दिया गया था| 

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) में मध्यम आय वर्ग के ऐसे लोगों को जिनकी सालाना आय 6 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, उन्हें 9 लाख रुपये के 20 साल अवधि वाले होम लोन (Home Loan) पर 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी| 

मसलन होम लोन (Home Loan) पर ब्याज की दर 9 फीसदी है तो आपको PMAY के तहत यह 5 फीसदी ही चुकानी होगी| 12 लाख से 18 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी| 
बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक और बहुत से संस्थान इस योजना का लाभ ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं| नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) और हुडको (HUDCO) भी इस योजना में शामिल हैं|

Saturday, June 29, 2019

पाईथागोरस

य़ोरुप में विद्या के आधुनिकीकरण की नींव पाईथागोरस ने भारतीय गणित को यूनान में प्रसारित कर के डाली थी। पाईथागोरस की जीवनी उस की मृत्यु के लगभग दो शताब्दी पश्चात टुकडों में उजागर हुयी जिस से पता चलता है कि उस का जन्म ईसा से 560 वर्ष पूर्व ऐशिया माईनर के ऐक दूीप सामोस पर हुआ था। संगीत और जिमनास्टिक की प्रारम्भिक शिक्षा के बाद वह मिस्त्र चला गया और बेबीलोन तथा उस के आसपास के क्षेत्रों में कुछ काल तक रहा था। उस क्षेत्र में भारतीय दर्शन ज्ञान, उपनिष्दों, गणित तथा रेखागणित का प्रसार और प्रभाव था सिकन्द्रीया विश्वविद्यालय स्थापित होने से पूर्व ही था। भारतीय संगीत के धरातल पर ही पाईथागोरस ने पाशचात्य संगीत पद्धति की आधार शिला बनाई थी। 


जब पाईथागोरस भारतीय प्रभाव के क्षेत्र में था तब ईरान ने मिस्त्र पर आक्रमण किया। पाईथागोरस को भी बन्दियों के साथ ईरान ले जाया गया । कालान्तर पाईथागोरस ईरान से पंजाब तक भारत में भी गया जहाँ उस ने यूनानी रीति रिवाज और वस्त्र त्याग कर भारत के पहाडी ढंग के टराउजर्स की तरह के परिधान अपना लिये थे। उसी तरह का परिधान पहने महारज कनिष्क को भी ऐक प्रतिमा में दिखाया गया है जो अफगानिस्तान में पाई गई थी। प्रतिमा में सम्राट कनिष्क को डबल ब्रेस्टिड कोट के साथ टराउजर्स पहने दिखाया गया है। यूनान में उस समय तक टराउजर्स नहीं पहनी जाती थीँ। टराउजर्स की ही तरह के पायजामे और सलवारें भारत ईरान घाटी में पहने जाते थे। अतः पाईथागोरस ने भारतीय रेखागणित के साथ साथ भारतीय वेश भूषा भी योरुप में प्रचिल्लत की थी।