Wednesday, February 25, 2015

कवि नर्मद


गुजराती भाषा के प्रणेता एवं गौरवान्वित वक्ता कवि नर्मदाशंकर लालशंकर दवे जो 'नर्मद' के नाम से सुप्रसिद्ध है उसका जन्म 24 अगस्त 1833 को गुजरात के सूरत शहर में हुआ था वे ब्राह्मण वर्ण के थे १८८० के दशक में हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का विचार सबसे पहेले इस कवि ने रखा था कवि नर्मद से ही गुजराती साहित्य का आधुनिक काल का प्रारंभ होता है वे गुजराती भाषा के सर्वप्रथम निबंधकार है इस महान कवि की मृत्यु 26 फ़रवरी 1886 को बंबई प्रेसीडेंसी में हुई थी


संगृहीत रूप में कवि नर्मद की रचनाएँ:
गद्य - 'नर्मगद्य', 'नर्मकोश', 'नर्मकथाकोश', 'धर्मविचार', 'जूनृं नर्मगद्य'
नाटक - 'सारशाकुंतल', 'रामजानकी दर्शन', 'द्वौपदी दर्शन', 'बालकृष्ण विजय', 'कृष्णकुमारी'
कविता - 'नर्म कविता', 'हिंदुओनी पडती'
आत्मचरित - 'मारी हकीकत'

कवि नर्मद की सुप्रसिद्ध कविता 'જય જય ગરવી ગુજરાત' जिसका गुजरात सरकार के समारोह के दौरान एक आधिकारिक राज्य गीत के रूप में प्रयोग किया जाता है 

જય જય ગરવી ગુજરાત! જય જય ગરવી ગુજરાત,
દીપે અરુણું પરભાત, જય જય ગરવી ગુજરાત!
ધ્વજ પ્રકાશશે ઝળળળ કસુંબી, પ્રેમ શૌર્ય અંકિત;
તું ભણવ ભણવ નિજ સંતજિ સઉને, પ્રેમ ભક્તિની રીત - 
ઊંચી તુજ સુંદર જાત, જય જય ગરવી ગુજરાત।

ઉત્તરમાં અંબા માત, પૂરવમાં કાળી માત,
છે દક્ષિણ દિશમાં કરંત રક્ષા, કુંતેશ્વર મહાદેવ;
ને સોમનાથ ને દ્ધારકેશ એ, પશ્વિમ કેરા દેવ-   
છે સહાયમાં સાક્ષાત, જય જય ગરવી ગુજરાત।

નદી તાપી નર્મદા જોય, મહી ને બીજી પણ જોય।
વળી જોય સુભટના જુદ્ધ રમણને, રત્નાકર સાગર;
પર્વત પરથી વીર પૂર્વજો, દે આશિષ જયકર-   
સંપે સોયે સઉ જાત, જય જય ગરવી ગુજરાત।
તે અણહિલવાડના રંગ, તે સિદ્ધ્રરાજ જયસિંગ।
તે રંગ થકી પણ અધિક સરસ રંગ, થશે સત્વરે માત!
શુભ શકુન દીસે મધ્યાહ્ન શોભશે, વીતી ગઈ છે રાત।
જન ઘૂમે નર્મદા સાથ, જય જય ગરવી ગુજરાત।  

१. नर्मद का पूरा नाम क्या था? - नर्मदाशंकर लालशंकर दवे
२. हिंदी साहित्य में आधुनिक काल की प्रारंभिक खंड का क्या नाम दिया जाता है? - 'भारतेंदु युग'
३. इसी तरह गुजराती साहित्य का आरम्भिक काल का प्रथम खंड को क्या कहा जाता है? - 'नर्मद युग'
४. कवि नर्मद ने किस नामक पाक्षिक पत्र बहार निकालकर क्रांति की विचारधारा को जनता में प्रचारित किया था? - 'डांडियों'
५. कवि नर्मद को 'अर्वाचीनों में आद्य' की संज्ञा किस साहित्यकार ने दी है?- प्रेमचंद मुंशी
६. 2004 में गुजरात की कोन सी यूनिवर्सिटी को कवि नर्मद के सन्मान में 'वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय' यह नाम दिया गया था? - दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय
७. कवि नर्मद के कोन से दो महाकाव्य अधूरे रह गए? - 'वीरसिंह' और 'रुदनरसिक'  
८. नर्मद की कोनसी आत्मकथा गुजराती साहित्य की पहेली आत्मकथा है? मारी हकीकत

जानकी वल्लभ शास्त्री