Wednesday, February 4, 2015

जानकीवल्लभ शास्त्री


जानकीवल्लभ शास्त्री जन्म ५ फरवरी १९१६ को बिहार के गया जिले के मैगरा गाँव में हुआ था। कविता के क्षेत्र में उन्होंने कुछ सीमित प्रयोग भी किए और सन चालीस के दशक में कई छंदबद्ध काव्य-कथाएँ लिखीं, जो 'गाथा` नामक उनके संग्रह में संकलित हैं। इसके अलावा उन्होंने कई काव्य-नाटकों की रचना की और 'राधा` जैसा श्रेष्ठ महाकाव्य रचा। परंतु शास्त्री की सृजनात्मक प्रतिभा अपने सर्वोत्तम रूप में उनके गीतों और ग़ज़लों में प्रकट होती है। २६ जनवरी २०१० को भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया किन्तु इसे 'मजाक' कहकर शास्त्रीजी ने अस्वीकार कर दिया। सात अप्रैल २०११ को मुजफ्फरपुर के निराला निकेतन में जानकीवल्लभ शास्त्री ने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं कई साहित्यकारों ने शोक जताया है।

१. आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री कौन थे? 
 - हिंदी संस्कृत के कवि, लेखक एवं आलोचक थे।
२. जानकीवल्लभ शास्त्री किस काल के सुविख्यात कवि थे? 
- छायावादोत्तर काल
३. उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें किस पुरस्कार से सम्मानित किया था? 
- भारत भारती पुरस्कार(भारत भारती पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सबसे बड़ा साहित्यिक पुरस्कार है।)
४. प्रारंभ में आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्रीजी ने कोनसी भाषा में कविताएँ लिखीं? 
– संस्कृत में
५. आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री किस की प्रेरणा से हिंदी साहित्य में आए? 
- महाकवि निराला

६. आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री किस समय के अंतिम स्तम्भ माने जाते है? 
– छायावाद के(छायावाद विशेष रूप से हिंदी साहित्य के रोमांटिक उत्थान की वह काव्य-धारा है जो लगभग ई.स. १९१८ से १९३६ तक की प्रमुख युगवाणी रही।)
७. जानकी वल्लभ शास्त्री का पहला कोनसा गीत बहुत लोकप्रिय हुआ? 
- 'किसने बांसुरी बजाई'

किसने बांसुरी बजाई ?
जनम-जनम की पहचानी-
वह तान कहां से आई?

अंग-अंग फूले कदम्ब-सम,
सांस-झकोरे झूले;
सूखी आंखों में यमुना की
लोल लहर लहराई!
किसने बांसुरी बजाई?

जटिल कर्म-पथ पर थर-थर-थर
कांप लगे रुकने पग,
कूक सुना सोए-सोए-से
हिय में हूक जगाई!
किसने बांसुरी बजाई?

मसक-मसक रहता मर्म-स्थल,
मर्मर करते प्राण,
कैसे इतनी कठिन रागिनी
कोमल सुर में गाई!
किसने बांसुरी बजाई?

उतर गगन से एक बार-
फिर पीकर विष का प्याला,
निर्मोही मोहन से रूठी
मीरा मृदु मुसकाई!
किसने बांसुरी बजाई? 

आर के नारायण




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