Monday, June 5, 2017

महान गणितज्ञ व खगोलशास्त्री आर्यभट



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जिस प्रकार आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र में निपुण थे उसी प्रकार आर्यभट प्राचीन गणितज्ञ व ज्योतिष विद्या में निपुण थे उसके साथ वह एक खगोलशास्त्री भी थे जो ग्रहों, नक्षत्रो की गतिविधि जान सकते थे। उनके के जीवन के बारे में अंदाजित जानकारी मिली है जो उसके ग्रंथो पर आधरित है जिसमे बताया गया है की उनकी जन्मतिथि 21 मार्च, 476 माना जाता है। जन्मस्थान में भी मतभेद है स्वयं ने कुसुमपुर जो आजकल पाटलिपुत्र या पटना से प्रसिद्ध है, तो किसी ने विन्ध्न पर्वत तो किसी ने केरल के निवासी माना है। ­­

आर्यभट ने एक स्थान पर स्वयं को कुलप आर्यभटकहा है, इसका अर्थ कुछ विद्वान् यह लगाते हैं कि वे नालन्दा विश्वविद्यालय के कुलपति भी थे। उनके ग्रन्थ आर्यभटीयम् से हमें उनकी  महत्वपूर्ण खोज एवं शोध की जानकारी मिलती है। उन्होंने सबसे पहले पाई का मूल्य बताया है तथा गणित के जटिल सवालों को सरलता से हल किया है। तथा शून्य की खोज करके अपना नाम इतिहास में अमर कर दिया, उनके योगदान को सदा स्मरण रखने के लिए 19 अपै्रल, 1975 को अन्तरिक्ष में स्थापित किये गये भारत में ही निर्मित प्रथम कृत्रिम  उपग्रह का नाम आर्यभटरखा गया। तथा चंद्रमा स्थित दरार का नाम आर्यभट रखा था। 

करुणा और सेवा की मूर्ति ‘मदर टेरेसा’                     
जोनास सॉल्क



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