Sunday, June 4, 2017

प्रयोगवाद के प्रणेता: ‘अज्ञेय’



आधुनिक काल के अज्ञेय जी हिन्दी साहित्य में सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे, जो एक कवि, शैलीकार, कथाकार के रूप में जाने जाते थे। नये-नये प्रयोग करके साहित्य को एक नया मोड़ प्रदान किया था। उनकी रचना बहुमुखी प्रतिभा की सहज परिणति थी जो वाचक पर अध्ययन की गहरी छाप पैदा करती थी। अज्ञेय ने हिन्दी एवं अंग्रेजी में कविता, उपन्यास, यात्रा वर्णन, डायरी, निबंध, नाटक, अनुवाद आदि की सौ से भी अधिक पुस्तकें लिखीं तथा उन्होंने तार सप्तकका संपादन किया था। अज्ञेयजी का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन जो अज्ञेयनाम से प्रसिद्ध थे।

उनका जन्म 7 मार्च 1911 उत्तरप्रदेश में हुआ था। बचपन में लोग उन्हें प्यार से सच्चाकहते थे। प्रसिद्ध साहित्यकार श्री जैनेन्द्र एवं प्रेमचंद ने उन्हें अज्ञेयनाम दिया, जो उनकी स्थायी पहचान बन गया। आजादी की लड़त में कही बार जेल गये थे तथा 1930 में क्रांतिकारियों ने भगतसिंह को जेल से छुड़ाने की योजना बनाई। 1975 में आपातकाल, सेंसरशिप तथा इंदिरा गांधी की तानाशाही का उन्होंने विरोध किया। साहित्य क्षेत्र के सभी बड़े पुरस्कार उन्हें मिले। उन्होंने वत्सल निधिकी स्थापना कर उसके द्वारा लेखन शिविर, हीरानंद शास्त्री एवं रायकृष्णदास व्याख्यान, जय जानकी यात्रा तथा भागवत भूमि यात्राओं का आयोजन किया था। 4 अप्रैल 1987 को दिल्ली में उनका देहांत हुआ।



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