Wednesday, July 19, 2017

विज्ञान को लोकप्रिय बनाने वाले साहित्यकार


भारतीय विज्ञान साहित्य को लोकप्रिय बनाने के लिए जिस कीर्ति जयंत विष्णु नार्लींकर को मिली है वे सायद ही किसी ओर को मिली होगी। उन्होंने कही भाषा मे विज्ञान की पुस्तके लिखी है, उसमे मराठी उसकी मूल भाषा है। उनका जन्म 19 जुलाई 1938 महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था; माता-पिता दोनों प्रखंड विद्वान थे। वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में गणित विषयमें पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की और खगोल-भौतिकीमें प्रवीणता प्रदान की और वे ब्रह्माण्ड के स्थिर अवस्था सिद्धांत के निष्णात है। 

‘स्थिर अवस्था सिद्धांत’ के जनक ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल के साथ इंग्लैंड में आइंस्टीन के सापेक्षिकता का सिद्धांत और माक सिद्धांतको जोड़कर हॉयल-नार्लीकर सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। विष्णु नार्लीकर को कई राष्ट्रीय व् अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले उन्हें कलिंग पुरस्कार, महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, स्मिथ पुरस्कार आदि से नवाजा गया है। उन्हें दूरदर्शन या रेडियो पर भी विज्ञान के अंतर्गत प्रवचन या सवाल-जवाब देते हुए प्रसारण किये गए है। 

जयंत विष्णु नार्लीकर विज्ञान प्रचार प्रकाशित पुस्तक ‘कुष्ण विवर और अन्य विज्ञान कथाए’ हिंदी विज्ञान कथा साहित्य के क्षेत्रमें एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। ‘घूमकेतु’ नमक पुस्तक में विज्ञान आधारित छोटी-छोटी कहानिया है जो हिंदी में है। विज्ञान कल्पित चर्चित उपन्यास ‘द रिटर्न ऑफ़ वामन’ की कथावस्तु भगवान विष्णु के वामन अवतार पर आधारित है। आज वह प्रतिष्ठित अध्यापक के रूप में काम करते है।