Tuesday, July 4, 2017

विश्वविजेता स्वामी विवेकानंद

    भारत की संस्कृतिकों वैश्विक पहचान देने वाले विश्वविजेता स्वामी विवेकानंद आज भी युवानो के लिए प्रेरणादायक रहे है। उनका जन्म भारत के कोलकाता शहरमें 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। विवेकानन्द का बचपन का नाम नरेन्द्र था। बचपन से ही वह साहसिक और प्रतिभावान व्यक्ति थे। उनके पिता उसको वकील बनाना चाहते थेपर वह धार्मिक वृति के थे। श्री रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे। आगे चलकर उन्होंने संन्यास ले लिया और उनका नाम विवेकानन्द हो गया।

   विवेकानंदने देश भ्रमण करने लगे और लोगों को जाग्रत करने लगे। अमेरिका जा कर उन्होंने अपने पहले ही वाक्य अमरीकावासियो भाइयो और बहिनो’ कहकर सबका दिल जीत लिया। भारत लौटकर उन्होंने श्री रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। भारतीय युवकों ने स्वामी विवेकानन्द कों नेता के रूप में स्वीकार कर लिया। वह एक महान चिंतन, देशभक्त, दार्शनिक, युवा संन्यासी और युवाओं के प्रेरणादायक व्यक्ति रहे है।


स्वामी विवेकानंदकों नवजागरण का अग्रदूत कहा गया है। उठोजागो और तब तक मत रुकोजब तक की अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ’ यही सूत्र उन्होंने अपने जीवन में अपनाया था। उन्होंने भारत के नवयुवानो को उम्मीद की एक नई किरण प्रदान की थी। वह जुलाई, 1902 को महासमाधि लेकर स्वयं को परमात्मा में लीन कर लिया था।



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