Wednesday, August 2, 2017

जर्मन गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गॉस

                           
      प्राईमरी क्लास में एक शिक्षक का प्रवेश होता है वो आज पढ़ाने के मूड में नहीं थे अंत: उन्होंने बच्चो को मुश्किल सवाल देता है यह सवाल था कि 1 से 100 तक की गिनतियों का जोड़ बताना है अब शिक्षक आराम से कुर्सी से पीठ टिकाकर सो जाते है; लेकिन पांच ही मिनिट में आठ वर्षीय एक बालक उसके आराम में खलेल डालता है शिक्षक की आँखे यह देखकर फट जाती है क्युकि उस बालक ने यह सवाल का हल विशेष तरीके से बहुत ही जल्द निकाल दिया था यह बालक और कोई नहीं बल्कि कार्ल फेडरिक ग्रॉस था गॉस को दुनिया ने 'गणित के राजकुमारकी पदवी दीजो निःसंदेह योग्य थी

कार्ल फेडरिक र्गोस       इस राजकुमार का जन्म 30 अप्रैल 1777 में जर्मनी में हुआ था 15 वय की आयु तक गणित के क्षेत्र में वे अनेक महान खोज कर चुके थे। उनका जन्म जर्मनी के ब्रुंसविक नामक स्थल पर एक ईट चुननेवाले मेमार के घर हुआ था इसकी गणितीय प्रश्नों को तत्काल हल कर देने की प्रतिभा का पता जब ब्रुंसविक के शासक को चला तब उन्होंने गटिंगन विश्वविद्यालय में अध्ययन करने की व्यवस्था कर दीवहा विद्यार्थी काल में अनेक आविष्कार किया। जिनमे बोडीज़ का नियम, बीजगणित की द्विपद प्रमेय, समांतर-गुणोत्तर श्रेणियों के माध्य सम्बन्धी प्रमेय, द्विघात व्युत्क्रम का नियम तथा अभाज्य संख्या प्रमेय मुख्य है 

       गणित और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उनका बहुत योगदान रहा है ग्राउस ने कभी गणित को "विज्ञान की रानी" भी कहाँ है सिरेस नामक ग्रह के सबंध में उन्होंने जो गणना की इसके कारण ग्राउस की गणना खगोलशास्त्रियों में भी की जाती है 1807 से मृत्यु पर्यत वे गर्टिगन वेधशाला का निदेशक रहे 77 वय की आयु में उनका निधन 23 फ़रवरी 1855 को गोटिंजन के हनोवर राज्य में हुआ था





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