Wednesday, August 30, 2017

जेनेरिक दवाएं सस्ती क्यों होती है?



WHO मुताबिक डॉक्टर्स अगर मरीज को जेनेरिक दवाएं लिखे तो विकसित देशो में 70 प्रतिशत और विकाशशील देशों में इससे भी ज्यादा स्वास्थ्य खर्च कम हो सकता है| इस दवाओं की कुल खपत कुल दवा बाजार की तुलना में 10 से 12 प्रतिशत है| आज बाजार में लगभग हर तरह की जेनेरिक दवाएं है; पर मुनाफा, कमीशन या लालच के कारण डॉक्टर, मेडिकल स्टोर्स और दवा कपनियां नहीं चाहेगी की जेनेरिक दवाओं की मांग बढे|

जेनेरिक दवाओं को ‘इंटरनेशनल नॉन प्रोपराईटी नेम मेडिसन’ भी कहते है| यह दवा ब्रांडेड दवाओं के समान ही होती है| साथ ही साथ जेनेरिक दवाएं WHO की ‘एसेंशियल ड्रग’ लिस्ट के मापदंड़ो के अनुरूप होती है| जेनेरिक दवाओं को बाजार में ब्रांडेड दवाओं की तरह ही आती है| इस दवाओं को गुणवत्ता मानकों की तमाम प्रक्रिया से ही गुजरना पड़ता है|

ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियाँ खुद तय करती है; पर जेनेरिक दवाओं की कीमत निर्धारित करने में सरकार का हस्तक्षेप होता है| ब्रांडेड दवा और जेनेरिक दवों में कम से कम पांच से दस गुना अंतर होता है| कई बार इसमें 90% तक का भी फर्क होता है|

यह दवाएं इसलिए सस्ती होती है क्युकि इस दवाएं बनाने वाली कंपनियों को अलग से अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रयोगशाला की जरुरुत नहीं पड़ती है| \यह दवा बनाने वाली कंपनियाँ विज्ञापन नहीं देती है| इसलिए इनका दाम बहुत कम हो जाता है और लोगों को सस्ते दामों पर भी दवायाँ मिल जाती है|

जब भी आप किसी डॉक्टर के पास जाये तो उन्हें जेनेरिक दवाएं लिखने और मेडिकल स्टोर्स पर जेनेरिक दवाएं की ही मांग करे|

img cradit : wikipedia

चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति
पंख तो हैं, पर उड़ नहीं पाते...