Thursday, August 24, 2017

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है; जो भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है। पुराणों मुताबिक गणेश का जन्म इसी दिन हुआ था। कई प्रमुख शहरो में गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और आस पास के लोग दर्शन करते है। महाराष्ट्र और इसके आसपास के क्षेत्र में यह त्यौहार गणेश चतुर्थी के दस दिन तक धामधूम से मनाया जाता है।

साल भर की चतुर्थी में गणेश चतुर्थी अहम होती दिन है। इस दिन भगवान गणपति की मूर्ति घर में स्थापित की जाती है और इस दिन से दस दिन तक घर में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता आती।

शिवपुराण मुताबिक एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थी। उसी समय उन्होंने गणेश को घर का पहरेदार बनाकर उस बालक को कहाँ की मेरे आने से पहले किसी को घर में प्रवेश न देना। कुछ ही समय बाद शिवजी घर आये और घर में प्रवेश करना चाहा तो यह बालक उन्हें रोक लिया। इस कारण पर यह बालक और शिव के गणों के बीच लड़ाई हुई; पर उसे कोई पराजित न कर सका। अंतत: भगवान शंकर क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणपति का शिर काट दिया। परिणाम माता पार्वती क्रोधित होकर प्रलय करने की ठान ली।

इससे देवतओं भयभीत हो गये और नारद जी के सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। भगवान शिव के निर्देश पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले हाथी का सर ले आए और शिवजी ने गज का मस्तक यह बालक के धड पर रखकर उन्हें जीवित किया।

माता पार्वती गणेश को गजमुख बालक को अपने ह्रह्य से लगाकर देवतओं में श्रेष्ठ होने का आर्शीवाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इस बालक को देवताओ के अध्यक्ष घोषित करके सबसे पहले पूजे जाने का वरदान दिया।

भगवान शंकर ने इसे विघ्न दूर करने में सर्वोपरी बनाया और कहाँ की तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गण का अध्यक्ष हो जाओ।

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