Wednesday, September 27, 2017

देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार

पनडुब्बी यानी सबमरीन एक प्रकार का वोटरक्राफ्ट है जो पानी के अंदर रहकर काम करता है। जो मानव निर्मित प्रणाली है। पनडुब्बियों का सर्वाधिक उपयोग सेना में किया जाता था। सबसे पहले पनडुब्बी का प्रयोग प्रथम विश्व युद्ध में हुआ। इसने विश्व का राजनैतिक मानचित्र भी बदलने में अहम् भूमिका प्रदान की है।


विश्व की पहली पनडुब्बी डच वैज्ञानिक द्वारा १६०२ में और पहली सैनिक पनडुब्बी १७७५ में बनाई गई थी। यह पानी के भीतर रहकर भी सैनिक के सभी कार्य कर सकती थी इसीलिए इसे अमेरिकी क्रांति में लाया गया था। समुद्र के पानी में से ऑक्सीजन ग्रहण करने वाली पनडुब्बी का भी निर्माण किया गया।

आधुनिक पनडुब्बियाँ कई सप्ताह या महीनों तक पानी के भीतर रह सकती है। द्वितीय विश्व युद्ध में पनडुब्बियों का उपयोग परिवहन के लिए किया गया था। आजकल इसका प्रयोग पर्यटन के लिये भी किया जाने लगा है। पनडुब्बी के अंदर कृत्रिम रूप से जीवन योग्य सभी व्यवस्था की जाती है। ये किसी भी देश की नौसेना का विशिष्ट हथियार बन गई हैं।


भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में १६ डीजल चलित पनडुब्बियाँ है। जो मुख्यरूप से रूस और जर्मनी में बनाई गई है। विश्व में सबसे ज्यादा पनडुब्बी वाला देश अमेरिका है इसके पास ७५ पनडुब्बी है। पनडुब्बियों पर कई लेखकों ने पुस्तकें भी लिखी हैं। पनडुब्बियों की दुनिया को छोटे परदे पर कई धारावाहिको में दिखाया गया है। होलीवुड के कुछ चलचित्रों जैसे आक्टोपस १, आक्टोपस २, द कोर में समुद्री दुनिया के मथकों को दिखाने के लिये भी पनडुब्बियो को दिखाया गया है।

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