Thursday, September 7, 2017

सब पढ़े सब बढ़े: विश्व साक्षरता दिवस


"ज्ञान इंसान को जीवन के सभी अंधेरों से बाहर निकाल एक बेहतर और उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करता है।" - ऋषि गौतम

आज विश्व के सामने कई मुसिबते खडी पड़ी है। इंसान की जरा सी लापरवाही किसी भी समय पर विकराल रूप दे सकती है, पर्यावरण संकट, प्रदुषण, जनसंख्या, बेरोजगारी, बीमारी, पाकृतिक आपदाओ आदि से पूरा विश्व घिरा हुआ है। इन सब मुसीबतों से कोई बचा सकता है तो वह है इंसानों की सुझबूझ और तकनीकी। सुझबूझ और तकनीकी के बिना शिक्षा को प्राप्त करना कितना मुश्किल है वो तो सब जानते है। आज विकास के इस दौर में शिक्षा ही सबसे बड़ी सहयोगी है। 'शिक्षा एक ऐसा धन है जो मनुष्य के साथ हमेशा रहता है, जो न बांट ने से कम होता है और न ही इसे कोई चुरा सकता है।'

इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि जिस देश ने सभ्यता और ज्ञान को अपनाया है उसका विकास अभूतपूर्व गति से हुआ है। शिक्षा के महत्व का वर्णन करना शब्दों में बेहद मुश्किल है और शायद इसीलिए हर साल 8 सितंबर को ‘विश्व साक्षरता दिवस’ मनाया जाता है।


कम साक्षरता होने से किसी भी देश को कितना नुकसान उठान पड़ता है इसका सबूत उनके विकास दर से ही पता चल जाता है। विश्व में साक्षरता को ध्यान में रखते हुए ही 17 नवम्बर 1965 को संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन(यूनेस्को) ने ८ सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस (International Literacy Day) घोषित किया। विश्व साक्षरता दिवस को पहेली बार 1966 में मनाया गया। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक रूप से साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालना है। यह उत्सव दुनियाभर में मनाया जाता है। सयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक समुदाय को साक्षरता के प्रति जागरूक करने के लिए इसकी शरुआत की थी प्रत्येक वर्ष एक नए उद्देश्य के साथ विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है।

साक्षरता का तात्पर्य सिर्फ़ पढ़ना-लिखना ही नहीं बल्कि यह सम्मान, अधिकार, कर्तव्य और सामाजिक विकास के प्रति जागरूकता लाना है। दुनिया में शिक्षा और ज्ञान बेहतर जीवन जीने के लिए ज़रूरी माध्यम है। साक्षरता गरीबी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद से निपटने में सहायक और समर्थ है। आज अनपढ़ता देश की प्रगति में बहुत बड़ी बाधा है।

भारत सरकार द्वारा साक्षरता को बढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, साक्षर भारत मिशन, मिड डे मील योजना, प्रौढ़ शिक्षा योजना, राजीव गांधी साक्षरता मिशन आदि न जाने कितने अभियान चलाए गए, मगर सफलता आशा के अनुरूप नहीं मिली। इनमें से मिड डे मील ही एक ऐसी योजना है जिसने देश में साक्षरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इसकी शुरूआत तमिलनाडु से हुई वहाँ 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.जी.रामचंद्रन ने 15 साल से कम उम्र के स्कूली बच्चों को प्रति दिन निःशुल्क भोजन देने की योजना शुरू की थी।

आज विश्व आगे बढ़ता जा रहा है और अगर भारत को भी प्रगति की राह पर कदम मिलाकर चलना है तो साक्षरता दर की वृद्धि करनी ही होगी।

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