Monday, September 18, 2017

ईश्वर कृत ग्रंथ : वेद


वेद प्राचीन भारत में रचित साहित्य है। जो हिन्दुओं का प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ है। भारतीय संस्कृति में वेद को सब शास्त्रों की मूल समझा गया है। वेद मात्र हिन्दू संस्कृति एवम हमारे देश का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे प्राचीन शास्त्र है। ये विश्व के उन प्राचीनतम धार्मिक ग्रंथो में है जिनके मन्त्र आज भी इस्तेमाल किये जाते है। वेदों में जीवन के गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं। वेदशब्द संस्कृत भाषा के 'विद्' धातु से बना है, इस तरह वेद का शाब्दिक अर्थ ज्ञानहोता है।



वेद ज्ञान का भंडार है। विज्ञान, खगोल विज्ञान, जीव, ईश्वर, अनादि निज स्वरूप का ज्ञान वेद में ही उपलब्ध है। केवल धार्मिक रूप से ही नहीं किन्तु ऐतिहासिक रूप से भी वेदों का असाधारण महत्व है। अमेरिका की विख्यात खगोल संस्था ने भी वेदों में शामिल ज्ञान को प्रमाणित माना है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है, की वेद सर्वशक्तिमान ईश्वर द्वारा दिए गए ज्ञान का खजाना है।


वेदो को चार भाग में विभजित किया गया है: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। इसमें सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद को माना जाता है पद्यात्मक रूप से लिखा यह ग्रंथ 1828 सूक्तो में विभाजित है; प्रसिद्ध गायत्री मंत्र भी इसी की देन है। यजुर्वेद में यज्ञ तथा तत्वज्ञान को महत्व दिया गया है; इसमें 40 अध्याय है। सामवेद शास्त्रीय संगीत तथा नृत्य के मूलको बताने वाला प्रथम गायन ग्रंथ है; इसमें 1810 छंद है। अथर्ववेद में दैनिक क्रिया तथा रोजबरोज के जीवन में उपयोगी ज्ञान की सपूर्ण माहिती विद्यमान है। 

यदि इस वैदिक साहित्य का संपूर्ण पालन किया जाए तो मनुष्य के सब दुर्गुणों का नाश होता है और मनुष्य को सुख-शन्ति की परम अनुभूति होती है।
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