Thursday, September 28, 2017

जलियावाला बाग हत्याकांड

सिख धर्म द्वारा प्रस्थापित खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिंद सिंह ने बैसाखी वाले दिन की थी उसी दिन ही पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियावाला बाग में हत्याकांड हुआ था। 13 अप्रैल 1919 के दिन रौलेट एक्ट का विरोध करके एक सभा हुई थी। जहाँ पर जनरल डायर अंग्रेज अफसर ने अकारण सभा पर गोलियां बरसा दीं।


इस हुमले के कारण 1000 अधिक व्यक्ति की मृत्यु हुई और 2000 से अधिक घायल हुआ थे। प्रथम विश्व युद्ध के समय में भारतीय नेताओ और जनता ने ब्रिटिशों का साथ दिया ताकि ब्रिटिश सरकार उनके वर्तन को बदले। लेकिन ब्रिटिश सरकार ने मोंटेगुचेम्सफोर्ड रिफोर्म लागु किया जो भारतीयों की भावना के खिलाफ था। इसके बाद भारतीय जनता ने अंग्रेजों का विरोध करना शुरू किया, इस विरोध को रोकने के लिए, ब्रिटिशरों ने भारत में रौलेट अधिनियम लागू किया।

अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक बैठक हुई थी; पूरे शहर में कर्फ्यू होने के बावजूद सैकड़ों लोग आये थे। उसके बाद ही जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ वहां आकर चेतावनी के बिना फायरिंग शुरू कर दीं। बाग़ से निकालने का एकमात्र संकरा रास्ता था, इसलिए लोग जान बचाने के लिए बाग़ में मौजूद कुवे में कूद गए। कुवा भी लाशों से भरा था और हजारों की मृत्यु हो गई।


इस घटना का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे बड़ा असर पड़ा। यह माना जाता है कि यह घटना भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत थी। 1997 में, महारानी एलिजाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 2013 में, ब्रिटिश प्रधान मंत्री डेविड कैमरन ने भी इस स्मारक पर आये थे। उन्होंने अपनी विजिटर्स बुक में लिखा कि ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।

अमृतसर में नरसंहार हो ने बाद यह स्थल एक राष्ट्रीय स्थल बन गया; वर्तमान समय में यहाँ एक मीनार बनाई गई है जहाँ शहीदों के नाम अंकित किये गए है। वह कुआँ भी विद्यमान है जिसे शहीदी कुए के नाम से पहचाना जाता है।

image credit : Wikipedia
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