Monday, September 18, 2017

‘इसरो’ क्या है ?



(इसरो) ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ भारत का  राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है। इसकी स्थापना 1939 में की गई और इसका मुख्यालय बेंगलोर स्थित है। इस संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत है। संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। अंतरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उदेश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी रोकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।


'इन्सेट' तथा ‘आईआरएस’ इसरो का प्रमुख कार्यक्रम है। आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है। इसरो को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 में इंदिरा गांधी पुरस्कार से सन्मानित किया गया। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम डॉ. विक्रम साराभाई की संकल्पना है, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा गया है।

भारत सरकार द्वारा 1972 में ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ जैसी रचना से अंतरिक्ष खोज करने में अधिक गति मिली थी। इसरो को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया है। भारत अंतरिक्ष कार्य के इतिहास में 70 वा दशक एक प्रयोगात्मक युग था। जिसके बीच ‘आर्यभट्ट’ ‘भास्कर’, रोहिणी’ तथा एप्पल जैसे प्रायोगिक उपग्रह से कार्यक्रम चलाया गया था। इसकी सफलता के बाद 80 वे दशक संचालक युग बन गया तब ‘इन्सैट’ और आईआरएस जैसे उपग्रह की शरुआत हुई थी।


भारत में आज अंतरिक्ष यान एक मजबूत यान बन गया है जिसकी सेवा दुसरे देशों में उपलब्ध कराई जाती है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है की वे अन्य देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ सहयोगी रहा है। आर्यभट इसरो का पहला उपग्रह है जिसे 19 अप्रैल 1975 रूस की मदद ले कर तैयार किया गया था।

दुनिया में केवल 6 स्थानिक एजंसियो के पास अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ने की क्षमता है; जिसमे इसरो भी दुनिया की 6 एजंसियो में से एक है। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है।

image credit : Wikipedia
image Source : Wikipedia



No comments:

Post a Comment