Tuesday, September 19, 2017

पवित्र स्थल माता के मढ़



पवित्र स्थल माता के मढ़ गुजरात राज्य के कच्छ जिल्ले में स्थित है। भुज से 90 कि.मी. के अंतर पर माँ आशापुरा का मंदिर स्थित है; जो गुजरात भर में 'माता के मढ़' से प्रसिद्ध है। यह मंदिर चारो और से छोटी छोटी टेकरीओं और पहाड़ो से घिरा हुआ है और यहाँ माँ आशापुरा कि 6 फुट ऊँची और 6 फुट चौड़ी प्रतिमा स्थित है। 

कहाँ जाता है के आज से लगभग डेढ़ हजार वर्ष पूर्वे देवचंद नामक मारवाड़ का कराड वैश्य कच्छ में व्यापर करता था। उस दौरान आज जहाँ माता आशापुरा के मंदिर है वहाँ आश्विन माह में नवरात्री होने के कारण वे माताजी कि स्थापना की और भक्ति-भावपूर्वक माता की आराधना की। इस से माता जी खूश होकर देवचंद को स्वप्न में दर्शन देते हुए कहाँ कि ‘जिस जगह पर तूने मेरी स्थापना की है वहाँ मेरा मंदिर स्थापन करना किन्तु 6 माह तक इस मंदिर का द्वार मत खोलना। इस वणिक ने खूश होकर माताजी ने जो कहाँ वो किया और मंदिर कि देखभाल के लिए गृह त्याग कर के यहाँ आकर बस गया।

5 माह पूर्ण होते ही मंदिर के द्वार के पीछे एक बार वणिक को पायल और गीत का मधुर आवाज़ सुनाई दिया और इस से रहा न गया। इसके कारण वे मंदिर का द्वार खोल दिया और मंदिर के भीतर जाते ही उसको दैवी के भव्य मूर्ति का दर्शन हुआ। किन्तु उसे याद आया कि वे माताजी वचन विरुद्ध द्वार खोल दिया है; जिसके कारण माताजी के अर्ध विकसित मूर्ति का ही निर्माण हुआ है।

अपनी भूल के बदल वे माताजी से माफ़ी मांगी और माताजी भी उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहाँ। वरदान में वणिक ने पुत्र रत्न की मांग की किन्तु माताजी ने उसे कहाँ कि तेरी जल्दबाजी के कारण में मेरा चरणों का प्रागटय अर्ध ही रह गया। 

नवरात्रि दौरान माँ आशापुरा के दर्शन के लिए लाखो तीर्थयात्रीयों पैदल दर्शन के लिए जाते है और अपनी अपनी मनोकामना पूर्ण करते है।

image credit : Wikipedia
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