Wednesday, October 11, 2017

क्या चींटियों की भी दुनिया होती है?


क्या चीटियों को भी दुनिया होती है? हा क्यों नहि! चीटियों को भी अपना शहर होता है। वह हमारी तरह छोटी-छोटी बस्तियाँ बनाकर भी रहती है और साथ ही साथ उसका राजा-राणी भी होते है। सिर्फ इतना ही नही, अलग अलग कम करने के लिए सेवक चीटियाँ भी होते है।


आश्चर्य होता है! जब इस चीटीयों की अपनी भी एक सेनाएँ होती है; जो बड़े से बड़े जानवरों का भी मुकाबला कर सकती है। आकार की द्रष्टि से तो वे बहुत ही छोटी होती है; पर बुद्धि की द्रष्टि से तो वह उतनी ही प्रखर होती है। अथक परिश्रम और सामूहिक स्तर पर कार्य करने का इससे बड़ा उदाहरण कही नहीं मिलेगा। 

चीटीं की सबसे बड़ी विशेषता यह है की वह हार तो कभी नहीं मानती। बार बार गिरकर भी चड़ना इनकी प्रवृति है। अनुशासन भी उनका प्रकृति का एक प्रमुख गुण है। दुनिया में अब तक इनकी 2000 से भी अधिक जातियाँ का अध्ययन हो चूका है।

चीटियों की हर जाति की अपनी अपनी सेनाएँ होती है; जो दुसरे पर हमला करती रहती है। मजबूत चीटियाँ कमजोर चीटियों के बिल में अपना कब्जा जमा लेती है और अण्डों पर भी कब्जा जमा लेती है। इस अण्डों के बच्चो से गुलामों का काम लिया जाता है।

एक जाति कि चीटियाँ एक देश के रूप में रहती है; जो उनमें से राजा-राणी और विभिन्न अधिकारी होते है। नौकर चीटियाँ जीवनभर सेवा कार्य करती है और किसान चीटीं का काम दुसरे चीटियों के लिए भोजन प्रबंध करना है।


नर चीटीं और मादा चीटीं आपस में ब्याह भी करती है। चीटियों का अपना महल भी होता है; जो 3 फुट तक ऊँचा होता है। कुछ चीटियों की जाति बड़ी खूंखार भी होती है; जो मध्य अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका व दक्षिण एशिया में से पाई जाती है। यह चीटियाँ लाखो कि संख्या में अपने शिकार की तलाश में निकलती है। जब कोई जानवर इस चीटीं के पंजे में फस जाता है, तब वह उसका सारा मांस खा जाती है।