Thursday, October 12, 2017

हैप्पी हार्मोन्स क्या है??

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ लोग के जीवन में गहरी निराशा छाई हुए है तो कोई हँसना भूल गया है। लेकिन क्या आप जानते है कि हमारे शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन्स है जो हमे कुदरती तौर पर खुश रखने का कम करते है। इंसान की 50% खुशियाँ इन्ही जीन्स पर निर्भर होती है।

आइए जानते है हैप्पी हार्मोन्स को...

1) डोपामाइन

यह एक न्यूरोट्रांसमीटर है; जो दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को तेज करता है। अगर आपकी वर्कप्लेस पर अच्छा काम करने से तारीफ़ होती है तो आपके शरीर में यह हार्मोन्स बढ़ता है। इससे आप अच्छा महसूस तो करते है, साथ ही साथ आपके व्यवहार में भी सुधार आता है। आप अपने जीवन में आसानी से प्राप्त किया जा सके ऐसा लक्ष्य बनाते है तो भी आपके शरीर में यह हार्मोन्स बढ़ता है। 




दुनियाभर में हुए शोधो के मुताबिक आपको सिर्फ वही संगीत सुनना चाहिए जो आपको शांति और सुकून दे। इससे आपके शरीर में डोपामाइन हार्मोन बढ़ता है जो शरीर में ख़ुशी एवं प्रसन्नता लाता है। क्या आप में मोटिवेशन की कमी है? तो आप रोजाना कुछ देर एकसरसाइज़ करके यह हार्मोन बढ़ा सकते है।

2) ऑक्सीटोसिन

इस हार्मोन को लव हार्मोन भी कहते है। जिस व्यक्ति में ऑक्सीटोसिन की मात्रा ज्यादा होती है उनकी संतुष्टि का स्तर भी ज्यादा होता है। इसलिए आप निःस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करे। रोजाना आप कुछ समय मालिश करके इस हार्मोन्स का लेवल मेंटेन कर सकते है।

3) सेरोटोनिन

इस हार्मोन्स से हमारा Mood अच्छा बनता है और तनाव भी कम होता है; जिससे आपका दिन काफी हद तक अच्छा रहता है। अगर आप अपना Mood रोजाना अच्छा रखना चाहते हो तो आप रोज कुछ देर तक सनबर्न करे। साथ ही साथ सूरजमुखी के बीज, केला, टमाटर, शहद और नारियल आदि का सेवन करना चाहिए। नियमित व्यायाम से भी इस हार्मोन्स का स्तर बना रहता है।



4) प्रोजेस्ट्रोन
चैन की नींद के लिए इस हार्मोन्स का होना बेहद जरुरी है। बेवजह तनाव न ले और खानपान में संतुलित आहार ले। इससे आपका यह हार्मोन्स का स्तर संतुलित रखा जा सक्ता है।

5) डोर्फिन्स

डोर्फिन्स को नेचरल पेनकिलर भी कहते है। डोर्फिन्स आपका Motivation बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। यह हार्मोन्स को आप मसालेदार खाना खाकर बढ़ा सकते है पर ध्यान रहे कि ज्यादातर मसालेदार खाना खाने से आपकी सेहत पर भी नुकशान हो सक्ता है। 

हमें छींक क्यों आती है?

ब्रेन ट्यूमर एक जानलेवा बीमारी