Friday, January 5, 2018

भारत में बेंको का उद्भव कब और कैसे हुआ?

भारत में आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का इतिहास 200 साल पुराना है। इनकी शुरुआत ब्रिटिश राज में हुए। 19वीं सदी के आरम्भ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 3 बेंको से शुरुआत की; 1809 में बैंक ऑफ़ बंगाल, 1840 में बेंक ऑफ़ बोम्बे और 1843 में बेंक ऑफ़ मद्रास। इस तीनो बेंको को विलय करके 'इंपीरियल बैंक' की स्थापना की; जिसे 1955 में 'भारतीय स्टेट बेंक' में विलय कर दिया।

भारत की पहली निजी बैंक इलहाबाद बेंक थी। 1935 में भारतीय रिजर्व बेंक की स्थापना हुई और इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ़ इण्डिया, केनेरा बैंक और इंडियन बेंक की स्थापना हुई। प्रारंभ में बेंक की शाखाएँ और उनका कारोबार वाणिज्यिक केन्द्रों तक ही सिमित था और बेंक अपनी सेवाएँ केवल वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को ही उपलब्ध करते थे।

स्वाधीनता पूर्वे केन्द्रीय बेंक के रूप में केवल RBI सक्रिय थी; जबकि सबसे प्रमुख बैंक इम्पीरियल बैंक थी। भारत में उस समय 3 तरह की बैंक कार्यरत थी -
                 1. भारतीय अनुसूचित बैंक, 
               2. गैर अनुसूचित बैंक और 
                                                                     3. विदेशी अनुसूचित बैंक।

स्वाधीनता उपरांत RBI को केन्द्रीय बैंक का दर्जा बरकरार रखा गया और उसे 'बैंको की बैंक' से भी घोषित किया गया। इसे सभी प्रकार की मौद्रिक नीतियाँ तय करना और अन्य बैंको एवम वित्तीय संस्थाओं को लागू कराने का दायित्व सौपा गया। इस कार्य में RBI की नियंत्रण तथा नियमन शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सन् 1949 में RBI का राष्ट्रीयकरण किया। इसके 1955 में इम्पीरियल बैंक ऑफ़ इण्डिया का भी राष्ट्रीयकरण हुआ और उसका नाम बदल कर भारतीय स्टेट बैंक किया गया। देशभर में आज लगभग SBI की 15,000 शाखाएँ है। वर्तमान में कुल 27 राष्ट्रीयकृत बैंक है।

बेंको द्वारा वर्तमान में आम लोगों के लिए खाता, धन हस्तांतरण, क्रेडिट और डेबिट कार्ड, लोकर्स आदि की सुविधाएँ दी जाती है।