Friday, June 29, 2018

दुनिया के महान ब्रह्माण्ड विज्ञानी : स्टीफन हॉकिंग


“मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के सामने खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।”
स्टीफन हॉकिंग

स्टिफन हॉकिंग एक विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, ब्रहमाण्ड विज्ञानी और लेखक थे| ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में उनका बड़ा योगदान रहा| 12 मानद डिग्रियाँ और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें प्राप्त हुए|

स्टिफन हॉकिंग का जन्म जनवरी 8, 1942 को फ्रेंक और इसाबेल के घर हुआ| परिवार में वित्तीय बाधा होने के बावजूद भी उनके माता-पिता की शिक्षा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुई|

स्टिफन आज दुनिया के महान ब्रह्माण्ड विज्ञानी माना जाता है; पर उनका स्कूली जीवन बहुत उत्कृष्ट नही था| शुरू में तो वे अपनी कक्षा में औसत से कम अंक पाने वाले छात्र थे; पर उन्हें बोर्ड गेम खेलना अच्छा लगता था| गणित में उन्हें बहुत दिलचस्पी थी; यहाँ तक की वो गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए लोगों की मदद से इलेक्ट्रॉनिक साधन के हिस्से से कम्प्युटर बना दिया था| गणित के अध्ययन की चाहत रखने वाले स्टिफन के लिए ऑक्सफोर्ड में कोई गणित उपलब्ध नहीं था; इसलिए वे भौतिकी कि पसंदगी की| मेधावी छात्र होने के नाते वे स्कूल और कॉलेज में हमेशा अव्वल आते थे| तीन सालो में ही स्टिफन को प्रकृति विज्ञान में प्रथम श्रेणी की ऑनर्स की डिग्री प्राप्त हुए; जो उनके पिता के किसी ख्वाब पुरे होने से कम नही था| बड़े होकर उनमे अंतरिक्ष-विज्ञान में खास रूचि जगी| इस वजह वे क्रैम्ब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय में चुने गये| स्टिफन के अंदर बचपन से ही महान वैज्ञानिक कि गुणवत्ता दिखाई देती थी| किसी भी कार्य की चीज का निर्माण और उसकी कार्य-प्रणाली को लेकर उनमे बहुत बड़ी जिज्ञासा थी| जिसका एक कारण यह भी था कि उनके सहपाठी और टीचर उन्हें प्यार से ‘आइन्स्टाइन’ कहकर बुलाते थे|


एक बार वे छुटिया मनाने के लिए अपने घर आये| वो सीढ़ी से उतर रहे थे तब उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वे गिर गये| सब ने कमजोरी कारण मन लिया; पर बार बार यह होने के कारण उन्हें बड़े डोक्टर के पास ले गये| उन्हें ‘न्यूरॉन मोर्टार डीसीस’ नामक एक बीमारी थी; जो कभी ठीक नही होने वाली एक बीमारी थी| इस बीमारी में शरीर के सरे अंग काम करना बंद हो जाता है| डॉक्टरों ने हॉकिंग को 2 साल के मेहमान कह दिया था; पर हॉकिंग ने कहाँ की वे 2 या 20 साल नही पर पूरे 50 सालो तक जियूँगा| उस समय सबने दिलासे के लिए हाँ में हाँ मिला दी थी| स्टिफन का पूरा दाहिना हिस्सा ख़राब हो चूका था और वे स्टिक के सहारे चलते थे| अब हॉकिंग अपने वैज्ञानिक जीवन में सफ़र शुरू किया और उनकी ख्याति पूरी दुनिया में फैलने लगी थी| उनका सारा अंग धीरे धीरे स्थिर होने लगा| रोग से पीड़ित होने के बावजूद भी किसी के सहारा बिना अपना कार्य को निरंतर रखा| 1974 में डॉक्टरेट की उपाधि के बाद दूनिया को अपना सिद्धांत दिया और पुरे विश्व में प्रख्यात वैज्ञानिक के रूप में जाना जाने लगे|

“लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।”
                                                                                                               स्टीफन हॉकिंग

14 मार्च 2018 की सुबह अपने घर कैम्ब्रिज में उनका निधन हो गया|


No comments:

Post a Comment