Thursday, July 19, 2018

ब्रेल लिपि कैसे काम करती है?

कहा जाता है इंसान सक्षम और अक्षम सिर्फ अपनी सोच से ही होता है| अगर वह ठान ले तो हर चुनौतियाँ और कमियाँ उसकी लगन के आगे घुटने टेक देती है| और सिर्फ इतना ही नहीं, कई दुसरे व्यक्तियों के लिए भी आगे बढ़ने का रास्ता और मिसाल छोड़ जाते है|

ऐसा ही एक नाम लुइस ब्रेल का है| उन्होंने एक हादसे में अपनी आँखों की रौशनी गवा दी| इनकी ब्रेल लिपि की मदद से आज दुनिया में ऐसे लाखो लोग जो देख नही सकते थे पर पढ़ना सीखकर अपने पैरों पर खड़े हो गये|



लुइस का जन्म 1809 में फ़्रांस में हुआ था| उनके पिता की काठी बनाने की दुकान थी| परिवार में कुल 4 भाई बहन थे, जिसमें लुइस सबसे छोटा था| तीन साल के उम्र में वे जब दुकान में खेल रहे थे; उसी दौरान लेदर के टुकड़े में वह नुकीले औजार से छेद करना चाहा| और वह औजार हाथ से फिसल कर उनकी आँख में चला गया| इस कारण उनकी आँख में गंभीर चोट आई और इन्फेक्शन हो गया और धीरे-धीरे यह इन्फेक्शन दूसरी आँख में भी चला गया| इस हादसे में 5 साल की ही उम्र में उनकी आँखों की रौशनी पूरी तरह से चली गई|

यह गंभीर हादसे के बाद भी लुइस कभी हिम्मत नही हारे| वे इसी चीज बनाना चाहते थे; जिससे दृष्टिहीन लोगों की मदद कर शके| इस कारण वे अपने नाम से एक राइटिंग स्टाइल बनाई; जिसमें सिक्स डॉट कोड्स थे और वही स्क्रिप्ट आगे चलकर 'ब्रेल' के नाम से जानी गई|

लुइस को संगीत में काफी दिलचस्पी थी और वह कई तरह के यंत्र बजा लेते थे| टी.बी. की बिमारी के कारण 43 साल की उम्र में उनका निधन हो गया|

इस लिपि का आविष्कार 1821 में लुइस ब्रेल ने किया था| इस लिपि में पहली किताब 1829 में प्रकाशित हुई थी| इसमें प्रत्येक आयताकार सेल में 6 डॉट्स होते है, जो थोड़े उभरे हुए होते है| इस डॉट्स की औसतन ऊंचाई 0.02 इंच होती है| इसे पढ़ने की विशेष तकनीक होती है पर विश्व भर में इस पढ़ने का कोई मानक मापदंड नही है| 

आधुनिक ब्रेल लिपि में 8 डॉट्स के सेल में विकसित किया गया है, ताकि अंधे लोगों को अधिक से अधिक शब्दों पढने की सुविधा उपलब्ध हो सके| इसमें अब 64 की बजाय 256 अक्षर, संख्या और विराम चिह्न पढ़ सकने की सुविधा उपलब्ध है|