Tuesday, January 29, 2019

क्लाउड कंप्यूटिंग क्या होता है?

हम आपको अपने इस पोस्ट में साधारण शब्दों में बताने जा रहे हैं बात करने वाले हैं क्लाउड कंप्यूटिंग(Cloud Computing) के बारे में। कि क्लाउड कंप्यूटिंग(Cloud Computing) क्या होता है? यह कैसे काम करता है? और कौन लोग इसे इस्तेमाल करते हैं? 
दोस्त आपको पता है कि जब हम कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं तो उसके कुछ रिसोर्सेस(Resources) का भी इस्तेमाल करते हैं। जैसे हार्ड डिस्क(Hard disk) हो गया या नेटवर्क हो गया, इन सभी चीजों का हम सब इस्तेमाल करते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग(Cloud Computing) में कुछ ऐसा होता है की एक कंप्यूटर(Computer) एक जगह होता है तो वह दूसरे जगह से डाटा(Data) ले सकता है। मतलब की उसके डाटा सेंटर(Data Center) दूसरे जगह फैले हो सकते हैं। हो सकता है कि उसका डाटा सेंटर(Data Center) एक सिटी में हूं या फिर दूसरे देश में हो। तो वह रिसोर्सेस शेयर करते हैं। जैसे नेटवर्क(Network) हो गया या फिर स्टोरेज(Storage) या कैपेसिटी(Capacity) के लिए जो डाटा सेंटर यूज(Use) होता है वह हो गया।

एक छोटे कंप्यूटर में डाटा स्टोरेज करने के लिए एक हार्ड डिस्क होती है। और किसी बड़े ऑर्गेनाइजेशन या बड़े कंपनी के बड़े-बड़े कंप्यूटर होते हैं, उनके डाटा स्टोर करने के लिए छोटी सी हार्ड डिस्क काम नहीं करती। क्यों की बहुत ज्यादा डाटा होता है, तो ज्यादा डाटा सेव करने के लिए बहुत बड़े-बड़े डाटा सेंटर चाहिए होते हैं। उदाहरण के लिए गूगल या फेसबुक का डाटा सेंटर ले लीजिए। इनके जो डाटा और जो स्टोरेज हैं वह बहुत बड़े होते है। क्योंकि इनके अंदर करोड़ो अरबो लोगों ने अपनी अकाउंट बनाई हुई है, तो इन बड़ी कंपनी के जो डाटा होता है वह बहुत ज्यादा होते हैं। कई कई लाख जीबी में, या उससे भी ज्यादा हो सकता है। तो वह सब एक हार्ड डिस्क में तो सेव नहीं हो सकता है। उसके लिए बहुत सारी हार्ड डिस्क चाहिए होती हैं। साधारण शब्दों में बोले तो इन्हे स्टोर करने के लिए एक डाटा सेंटर चाहिए होता है।

डाटा सेंटर में अलग-अलग यूनिट होती है, अलग अलग यूनिट से अलग अलग हार्ड डिस्क होती है। उनमें अलग अलग चेंबर होते हैं। आप कह सकते हैं कि एक छोटे शहर के बराबर या उस से भी बड़े तो बड़े कंपनियों के डाटा सेंटर होते हैं।

दोस्तों यही केस नेटवर्क के स्टोरेज में भी होता है कि उनके जो नेटवर्क होते हैं जो इंटरनेट प्रोवाइड करते है उनके जो सेंटर होते हैं वह भी बहुत बड़े बड़े होते हैं। तो मान लीजिये एक ऑर्गेनाइजेशन है जिसकी नीड बहुत ज्यादा है, लेकिन हर ऑर्गेनाइजेशन अपनी खुद की डाटा सेंटर या नेटवर्क नहीं बना सकती। अगर वह ऐसा करेगी तो उसे प्रॉफिट कम होगा और लागत ज्यादा लगेगी। तो इस केस में वह ऑर्गेनाइजेशन या बड़ी कंपनी किसी क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनी से अटैच हो जाती हैं , टाई अप कर लेती है कि आप हमारा डाटा स्टोर कर लो, उसके बदले हम आपको मंथली पैसे देंगे, या जो भी देंगे। तो यह अलग कंपनियां होती हैं जो डाटा के साथ हैंडल करती हैं या नेटवर्क के साथ हैंडल करती हैं। तो दोस्तों इस केस में क्लाउड कंप्यूटिंग सामने आता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग को अगर आप साधारण भाषा में बोले तो आप कहीं दूर किसी चीज को सेव करना, वहां से किसी डाटा को शेयर करना या अपने रिसोर्सेस को अलग-अलग जगह बांट देना। सिंपल फॉर्म अगर बोलेंगे तो इसका मतलब यही होता है|

Join Our Telegram Channel For Latest Updates  

No comments:

Post a Comment