Thursday, February 7, 2019

आधुनिक भूगोल का अनावरण

पंद्रहवीं शताब्दी के अंत तथा सोलहवीं शती के प्रारंभ में मैगेलैन तथा ड्रेक ने अटलांटिक तथा प्रशांत महासागरों के स्थलों का पता लगाया तथा संसार का परिभ्रमण किया। स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैंड के खोजी यात्रियों (explorers) ने संसार के नए स्थलों को खोजा। नवीन संसार की सीमा निश्चित की गई। 16वीं और 17वीं शताब्दियों में विस्तार, स्थिति, पर्वतो तथा नदी प्रणालियों के ज्ञान की सूची बढ़ती गई जिनका श्रृंखलाबद्ध रूप मानचित्रकारों ने दिया। इस क्षेत्र में मर्केटर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। मर्केटर प्रक्षेप तथा अन्य प्रक्षेपों के विकास के साथ भूगोल, नौवाहन और मानचित्र विज्ञान में अभूतपूर्व सुधार हुआ|

बर्नार्ड वारेन या (वेरेनियस) ने 1630 ई॰ में ऐम्सटरडैम में 'ज्योग्रफिया जेनरलिस' (Geographia Generalis) ग्रंथ लिखा 28 वर्ष की अवस्था में इस जर्मन डाक्टर लेखक की मृत्यु सन् 1650 में हुई। इस ग्रंथ में संसार के मनुष्यों के श्रृखंलाबद्ध दिगंतर का सर्वप्रथम विश्लेषण किया गया।
18वीं शताब्दी में भूगोल के सिद्धांतों का विकास हुआ। इस शताब्दी के भूगोलवेत्ताओं में इमानुएल कांट की धारणा सराहनीय है। कांट ने भूगोल के पाँच खंड किए :
·         (1) गणितीय भूगोल - सौर परिवार में पृथ्वी की स्थिति तथा इसका रूप, अकार, गति का वर्णन;
·         (2) नैतिक भूगोल -- मानवजाति के आवासीय क्षेत्र पर निर्धारित रीति रिवाज तथा लक्षण का वर्णन;
·         (3) राजनीतिक भूगोल -- संगठित शासनानुसार विभाजन;
·         (4) वाणिज्य भूगोल (Mercantile Geography)-- देश के बचे हुए उपज के व्यापार का भूगोल; तथा
·         (5) धार्मिक भूगोल (Theological Geography) धर्मो के वितरण का भूगोल।
कांट के अनुसार भौतिक भूगोल के दो खंड हैं-
·         (क) सामान्य पृथ्वी, जलवायु और स्थल,

·         (ख) विशिष्ट मानवजाति, जंतु, वनस्पति तथा खनिज।

No comments:

Post a Comment