Monday, August 19, 2019

मैन वर्सेस वाइल्ड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जंगल में होना इसकी सबसे रोमांचकारी बात नहीं है

अगर बराक ओबामा से तुलना करें तो ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ का नरेंद्र मोदी वाला एपिसोड रोमांच के मामले में ज्यादा नंबर बटोर लेता है। 

अगर मजे-मजे में इस आलेख की शुरूआत करनी हो तो कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी दुनिया के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो हिंदी बोलकर भी बेयर ग्रिल्स जैसे अंग्रेजों को अपनी बात समझा लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इस स्पेशल एपिसोड में ज्यादातर वक्त हिंदी में बात करते नज़र आते हैं। जब वे ऐसा कर रहे होते हैं, तब शो के एंकर बेयर ग्रिल्स सहमति में सिर हिलाते दिखाई देते हैं लेकिन उनका तरीका जरा बनावटी लगता है। इस पर भी अगर चुटकी लेने की इजाजत मिले तो हम कहना चाहेंगे कि हमारे प्रधानमंत्री इस शो में ग्रिल्स से कहीं बेहतर अभिनय करते नज़र आए हैं। 

‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इस एपिसोड में नरेंद्र मोदी और बेयर ग्रिल्स के अभिनय करने की बात गंभीरता से भी कही जा सकती है क्योंकि जानने वाले इस बात को जानते हैं कि ग्रिल्स को जरा भी हिंदी नहीं आती है। इसका सीधा मतलब है कि नरेंद्र मोदी को अनजानी रोमांचक यात्रा पर ले जाने का दावा करने वाले इस शो की बातचीत तक स्क्रिप्टेड थी। हालांकि मोदी जैसी हस्तियों के मामले में अक्सर ऐसा होता ही है। लेकिन इस शो में बिलकुल हिंदी न जानने वाले बेयर ग्रिल्स के साथ जिस सहजता से प्रधानमंत्री की बातचीत को दिखाया गया है वह कुछ लोगों को थोड़ा अटपटा लग सकता है। 


इस कार्यक्रम के एक बड़े हिस्से में बड़े इत्मीनान से मोदीजी, ग्रिल्स को बताते हैं कि उनका बचपन बेहद गरीबी में कटा, वे एक समय स्टेशन पर चाय बेचा करते थे और पढ़ाई में बहुत अच्छा न होने के बावजूद एक अनुशासित छात्र थे। इसके अलावा, बचपन में वे मगरमच्छ के बच्चे को घर उठा लाने की घटना भी सुनाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरुकता का संदेश देने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी, प्रकृति से जुड़े कुछ प्रभावित करने वाले किस्से भी बांटते हैं। मसलन, वे बताते हैं कि उनके पिता बारिश के आने पर चिट्ठी लिखकर लोगों को इसकी खबर दिया करते थे, यह प्रकृति के त्यौहार को मनाने का अनूठा तरीका कहा जा सकता है। साथ ही, वे ओस की बूंदों की वजह से जमी हुई नमक की परत से कपड़े धोने और नहाने की बात भी कहते हैं जो थोड़ी अजीब लगने के चलते आपका ध्यान खींचती है। इसके अलावा, वे कार्यक्रम के दौरान जानवरों से हिंसा ना करने और शाकाहारी होने की जरूरी बात भी कहते नज़र आते हैं। 

इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री, बेयर ग्रिल्स के केवल एक ही सवाल का उत्तर नहीं देते हैं। जब ग्रिल्स उनसे पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद वे खुद को क्या करते हुए देखते हैं, तो मोदी इसका जवाब देने की बजाय उनसे विदा ले लेते हैं। ऐसे में एक अंदेशा होता है कि शायद ग्रिल्स ने यह सवाल स्क्रिप्ट से अलग हटकर पूछ लिया था और नरेंद्र मोदी इसका जवाब कुछ विशेष कारणों से नहीं देना चाहते थे। क्योंकि इसके बाद चलते-चलते सेल्फी लेते हुए ग्रिल्स प्रधानमंत्री से उनके अंडरपैंट्स के सूखे होने के बारे में पूछते हैं तो मोदी बहुत हाजिर जवाबी से कहते हैं कि वे आज के दिन का काम चला लेंगे। 

इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अपने बचपन, हिमालय में गुजारे समय और राजनीति के बारे में बात करते हैं तो ज्यादातर वक्त लगभग वही बातें दोहराते हैं जो वे पहले भी कई बार कह चुके हैं। ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के बारे में दावा किया जाता है कि यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो दुनिया के 180 देशों में प्रसारित होता है। इसका मतलब है कि इसके दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजी बोलने-समझने वाले लोगों का होगा और उसे प्रधानमंत्री के बारे में ये सामान्य बातें भी नहीं मालूम होंगी। लेकिन अगर इन बातों को दोहराने का मकसद, इन्हें ऐसे दर्शकों तक पहुंचाना ही था तो फिर ये हिंदी में क्यों कही गईं? वह भी तब जब प्रधानमंत्री के बारे में यह बात प्रचारित रही है कि वे हिंदी और गुजराती के साथ, अंग्रेजी भी भली तरह से समझते और बोलते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इंटरनेशनल टेलीविजन पर सीधे अपनी बात पहुंचाने के बजाय पीएम मोदी ने यह काम अनुवादकों के जिम्मे क्यों छोड़ दिया? 

वे ऐसा क्यों करते हैं, इसका अंदाजा आपको थोड़े टेढ़े रास्ते से ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ के इसी एपिसोड से ही मिल जाता है। कार्यक्रम की शुरूआत में बेयर ग्रिल्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ‘उन्हें हाल ही में यूएन चैम्पियनशिप ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है।’ यहां पर ध्यान देने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह अवार्ड अक्टूबर-2018 में दिया गया था और यह कार्यक्रम फरवरी-2019 में शूट किया गया है। फरवरी में तो यह कहा जा सकता था कि अवॉर्ड ‘हाल ही में’ दिया गया है लेकिन अगस्त में इस बारे में जानकारी देते हुए कहा जाएगा कि यह अवॉर्ड ‘बीते साल’ अक्टूबर में दिया गया था। इससे अंदाजा लगता है कि यह कार्यक्रम न सिर्फ फरवरी-2019 में शूट किया था बल्कि इसे उसी समय यानी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रसारित किया जाना था। बहुत संभावना है कि शूटिंग वाले दिन ही पुलवामा हमला हो जाने के चलते, किसी विवाद से बचने के लिए इसका प्रसारण कुछ महीनों के लिए टाल दिया गया हो। अब चाहें तो सोच सकते हैं कि शायद इस कार्यक्रम के जरिये प्रधानमंत्री दुनिया भर के लोगों से अप्रत्यक्ष तरीके से और भारतीय जनता से सीधे तरीके से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी मैन वर्सेस वाइल्ड में शिरकत कर चुके हैं। अगर उनसे तुलना करें तो नरेंद्र मोदी वाला एपिसोड रोमांच के मामले में ज्यादा नंबर बटोर लेता है। इसमें प्रधानमंत्री चाकू से भाला बनाने और बांस की नाव पर लटकने में ग्रिल्स की मदद करते और उसके जरिए नदी पार करते दिखाई देते हैं। जबकि ओबामा वाले एपिसोड में ऐसा कोई दृश्य नहीं है। बातचीत के दौरान बराक ओबामा जहां बतौर राष्ट्रपति अपने जीवन के बारे में बहुत सहजता से बताते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि वे जंगल में बहुत सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी इसमें एक आदर्श निडर पुरुष के रूप में नजर आते हैं। इसके अलावा, अलास्का ग्लेशियर के संरक्षण की बात करने पहुंचे ओबामा कार्यक्रम के दौरान बहुत गंभीरता से इस पर चर्चा करते दिखते हैं, जबकि मोदी काफी हल्के-फुल्के तरीके से और भारतीय संस्कृति के उदाहरण देकर बताते हैं कि प्रकृति का संरक्षण तो हमारी परंपरा का हिस्सा है। 

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